ताजा खबर

मरवाही में पहले-दूसरे नंबर के दल एक हुए, कांग्रेस में हडक़म्प
31-Oct-2020 9:49 PM
मरवाही में पहले-दूसरे नंबर के दल एक हुए, कांग्रेस में हडक़म्प

  जनता कांग्रेस का भाजपा को खुला समर्थन असर डालेगा नतीजे पर  

राजेश अग्रवाल
बिलासपुर, 31 अक्टूबर (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)।
भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की घोषणा से मरवाही विधानसभा उप-चुनाव की तस्वीर में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। अब जब चुनाव अभियान खत्म होने में 24 घंटे से भी कम समय रह गया है, कांग्रेस ने अपनी अब तक की मेहनत को बचाये रखने के लिये एड़ी-चोटी की जोर लगा दी है वहीं जोगी पर आस्था रखने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की भीड़ जोगी निवास में बढ़ गई है। मतदाताओं में इसका मिला-जुला असर होने वाला है जिसका असर सीधे चुनाव परिणाम पर पड़ेगा।

अमित जोगी, डॉ. ऋचा जोगी व छजकां के अन्य दो वैकल्पिक प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त होने के बाद जोगी निवास सूनसान हो चुका था। यह स्थिति कल शाम तक बनी हुई थी, जब तक लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह ठाकुर ने पार्टी की तरफ से भाजपा को समर्थन देने का ऐलान नहीं किया। आज सुबह से जोगी निवास खुल गया। उनकी पार्टी के प्रवक्ता विक्रांत तिवारी से जब पूछा गया कि पार्टी के सारे नामचीन लोग तो कांग्रेस में आ गये हैं अब कौन आपको साथ दे रहा है, उन्होंने कहा कि जिन्हें जोगी के साथ रहते लाभ मिला अब किसी लालच में उनके साथ चले गये पर एक भी समर्पित किसी भी कार्यकर्ता ने जोगी परिवार का साथ नहीं छोड़ा है। वे अब गांव-गांव घूम रहे हैं।

कांग्रेस की पृष्ठभूमि से निकले जोगी समर्थक आम मतदाता को भाजपा को वोट देने के लिये तैयार करना काफी मुश्किल है। इसीलिये छजकां ने जोगी के ‘अपमान’ का मुद्दा सामने रखा है और लक्ष्य भाजपा को समर्थन नहीं, कांग्रेस को हराना बताया है। 

भाजपा के रणनीतिकारों ने अपने चुनावी अभियान में शुरूआती दौर से ही जोगी परिवार के प्रति कांग्रेस के रुख को मुद्दा बना रखा है। उनकी जनसभाओं की शुरूआत ही जोगी को याद करने और उनकी ओर से किसी को चुनाव नहीं लडऩे देने से होती है। भाजपा ने अपने सभी प्रमुख आदिवासी चेहरों को मैदान में उतार रखा है। इनमें केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. रेणुका सिंह और राज्यसभा सदस्य रामविचार नेताम शामिल हैं। नंदकुमार साय और ननकीराम कंवर जैसे नेता इन मंचों से गायब हैं जो जोगी की जाति पर आये फैसले को सही बताते हैं। 

भाजपा नेता इस पर बात नहीं कर रहे हैं कि लगातार जोगी के रहते उन्हें किस तरह दहशत और तानाशाही का प्रतीक बताते थे और उन्हें इसके चलते सरकार दुबारा, तीसरी बार बनाने में मदद मिलती रही। अब वे यह कह रहे हैं कि कांग्रेस, जोगी को ऊपर जाने के बाद भी नहीं छोड़ रही है। चुनाव संचालन जरूर पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल के हाथों में दिया गया लेकिन अभ ये दोनों आदिवासी नेता और डॉ. रमन सिंह खुद सामने हैं। 

डॉ. सिंह, धर्मजीत से मुलाकात कर एक बड़ी कामयाबी हाथ ले गये। यदि इस चुनाव में भाजपा अच्छी स्थिति में रही तो केन्द्रीय नेतृत्व तक उनके वजन को सराहा जायेगा। बीते चुनाव में हुई भाजपा की बुरी पराजय की बड़ी लकीर को छोटा करने में उन्हें मदद मिलेगी।   

कांग्रेस ने पिछले तीन-चार दिनों से जोगी के खिलाफ कुछ नहीं बोलने की रणनीति पर काम कर रखा है। कांग्रेस की यहां बड़ी भीड़ बहुत दिनों से काम कर रही है। इनमें से बहुत लोग मरवाही की तासीर नहीं जानते। उन्हें लगता था कि जोगी की जाति को सवालों में घेरकर वे यहां के मतदाताओं को अपनी ओर खींच सकते हैं पर इस तथ्य पर गौर नहीं किया कि सरकार और अदालतों में जाति मुद्दे पर केस चलने के बावजूद स्व. अजीत जोगी और अमित जोगी के लिये एकतरफा वोट गिरते रहे हैं।

कल के घटनाक्रम से पहले तक, बीते दो माह से ज्यादा समय से बिलासपुर, रायपुर, कोरबा से आकर मेहनत कर रहे कांग्रेस नेता अपनी मेहनत पर संतुष्ट थे। इस बात से कि जोगी पर आस्था रखने वाले मतदाता, जो वास्तव में कांग्रेस की ओर झुकाव रखते आये हैं उन्हें स्वतंत्रता मिली हुई है कि वे अपना वोट किसे देंगे, खुद तय करें। वे यह बताते आ रहे थे कि आप वास्तव में कांग्रेसी हैं और अब जोगी जी के नहीं होने पर आपको कांग्रेस का साथ देना है। पर अब जोगी परिवार और जकांछ के विधायक धर्मजीत सिंह की ओर से आह्वान हो गया है उनके वोट भाजपा को जायें।

कोई दावा नहीं कर सकता कि खुलकर सामने आने के बाद अब तक संभाले गये वोटों को भाजपा की ओर झुकाने में जनता कांग्रेस के नेता कितने कामयाब होते हैं पर हलचल तो मची हुई है। भाजपा उत्साहित है और अब तक संजीदगी से चुनाव लड़ रही कांग्रेस बचे हुए समय में अपने साधे हुए वोटों को और अधिक मजबूती से बचाये रखने की कोशिश में हैं।

 प्रतीत होता है कि इस चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के पास भाजपा के खिलाफ बोलने के लिये कुछ नहीं रहेगा। पहले ही कयास थे कि विधायक धर्मजीत सिंह कांग्रेस में नहीं जाना चाहते और कांग्रेस के रणनीतिकार उन्हें लेने से भी बच रहे हैं। 

डॉ. रेणु जोगी कोटा से चुनाव लडऩे के पहले तक कांग्रेस के साथ रहीं और स्व. जोगी की किताब छपने के बाद तक दिल्ली रुककर वहां हाईकमान से जुड़े रहने का संकेत देती रहीं। पार्टी के दो विधायक देवव्रत सिंह और प्रमोद शर्मा कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। यानि सबका रास्ता अलग-अलग है। चुनाव के बाद इस छोटे कुनबे में एक बड़ा बिखराब तय है।

मरवाही चुनाव दिलचस्प है क्योंकि सन् 2018 में पहले स्थान पर रही छजकां और दूसरे स्थान पर रही भाजपा अब कांग्रेस के खिलाफ एक हो गई है। कांग्रेस ने प्रदेश में मिली ऐतिहासिक जीत का सिलसिला दोहराने की ठान रखी है जहां पिछली बार उसके प्रत्याशी को तीसरे स्थान पर रहना पड़ा।   


अन्य पोस्ट