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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाई नगर, 16 अक्टूबर। नंदिनी थाने से 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम हरदी के किसान लीलू पटेल 45 साल द्वारा खेत में पेड़ के सहारे बुधवार की सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली गई। खाना लेकर पहुंचे बड़े लडक़े टोमन पटेल 19 वर्ष के द्वारा 11.00 बजे के करीब पिता को फंदे पर झूलते हुए देखा गया था। तत्काल ग्राम सरपंच को सूचित किया। सरपंच द्वारा कोटवार के माध्यम से नंदिनी पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस विलंब से दोपहर को पहुंची। मृतक किसान के पास से सुसाइडल नोट नहीं मिला है।
किसान द्वारा आत्महत्या किए जाने का कारण अज्ञात है। दूसरी ओर थाना नंदिनी प्रभारी के द्वारा सरकारी एवं निजी फोन रिसीव नहीं किया जा रहा है। दूसरी ओर परिजनों में मृतक किसान के दामाद जीवनलाल पटेल ने बताया कि किसान पर सवा लाख रुपए का कर्ज था और इस बार की फसल भी कीट प्रकोप के कारण बर्बाद हो चुकी है ।
दूसरी ओर धमधा एसडीएम बृजेश सिंह क्षत्रिय ने बताया कि कर्जमाफी के समय किसान को शासन की ओर से भुगतान किया गया था। परंतु मृतक किसान के द्वारा कर्जमाफी के एवज में मिली राशि से कर्ज का भुगतान ना करते हुए व्यक्तिगत कार्यों में खर्च किया गया था।
मृतक किसान लीलू पटेल 45 वर्ष के दामाद जीवन लाल पटेल ने ‘छत्तीसगढ़’ को बताया कि घटना के दिन बुधवार को प्रतिदिन की भांति किसान सुबह 3.30 बजे घर से खेत के लिए रवाना हुए थे। सुबह होने पर थोड़ी देर बाद उनका बड़ा लडक़ा भी टोमन पटेल भी खेत में पिता के पास मदद की पहुंच गया था करीब 10.00 बजे खाना लेने के लिए घर आया था। पुन: 11.00 बजे जब खेत पहुंचा तो देखा कि उसके पिता ने पेड़ के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। तत्काल सरपंच को घटना की सूचना दी।
सरपंच के द्वारा ग्राम कोटवार के माध्यम से नंदनी पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने के बाद भी नंदिनी पुलिस दोपहर 3.30 बजे तक नहीं पहुंची थी उसके पूर्व पटवारी एवं तहसीलदार घटनास्थल पहुंचे थे। मृतक किसान के दमाद जीवन लाल पटेल ने बताया कि किसान ने बैंक ऑफ इंडिया ग्राम पथरिया शाखा से वर्ष 2017 में सवा लाख रुपए का कर्ज था। इस वर्ष फसल भी कीट प्रकोप के कारण क्षतिग्रस्त हुई है।
इस कारण से पिछले तीन-चार दिनों से परेशान थे और घर पर किसी से बात भी नहीं कर रहे थे मात्र 1 एकड़ 25 डिसमिल खेत का रकबा था जबकि परिवार बड़ा है। कर्ज और खर्च दोनों ही के तनाव के कारण परेशान थे।
दूसरी ओर एसडीएम धमधा बृजेश सिंह क्षत्रिय ने बताया कि ग्रामीणों मिली जानकारी के अनुसार पारिवारिक तनाव उन पर हावी था दूसरी ओर कर्ज माफी की मिली रकम से किसान के द्वारा बैंक का नहीं चुकाया गया था मेरी राशि को व्यक्तिगत कार्यों में खर्च किया था कर्ज भुगतान को लेकर के बैंक शाखा के द्वारा भी कोई दबाव किसान पर नहीं बनाया गया था।


