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तस्वीर : अमित जोगी के ट्विटर अकाउंट से
नेताम ने की लम्बी शिकायत
राजेश अग्रवाल
बिलासपुर, 6 अक्टूबर (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। पूर्व विधायक अमित जोगी के मरवाही से चुनाव लडऩे में अवरोध की आशंकाओं के बीच उनकी पत्नी ऋचा जोगी के नाम से आदिवासी जाति प्रमाण पत्र जारी हो चुका है। कांग्रेस प्रवक्ता इस मामले में बचाव की मुद्रा में हैं। इस मामले की लड़ाई पहले की तरह संत कुमार नेताम लड़ रहे हैं और उन्होंने बहुत से बिन्दुओं पर मुंगेली कलेक्टर और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की है।
इस समय सबसे चर्चित मरवाही विधानसभा सीट पर रोज नई हलचलें हो रही है। आज पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के बेटे पूर्व विधायक अमित जोगी की पत्नी ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र चर्चा में है। उनके पैतृक निवास मुंगेली जिले के जरहागांव राजस्व मंडल से उन्हें पिछले जुलाई माह में आदिवासी जाति प्रमाण पत्र जारी हो गया है। अमित जोगी ने पूर्व में बयान दिया था कि जाति छानबीन समिति के प्रावधानों में संशोधन करके सरकार गैरकानूनी काम कर रही है और सरकार का पूरा प्रयास उन्हें चुनाव लडऩे से रोकने का रहा है।
अमित जोगी की पत्नी ऋचा जोगी का प्रमाण पत्र ऋचा रूपाली साधू के नाम से मुंगेली अनुविभागीय अधिकारी ने बीते 17 जुलाई को जारी कर रखा है। इसका खुलासा तब हुआ जब बीते 20 वर्षों से स्व. अजीत जोगी की आदिवासी जाति को चुनौती देते हुए अदालतों में केस लगाने वाले संत कुमार नेताम ने ऋचा रुपाली जोगी के नाम से मुंगेली जिले के जरहागांव से तहसीलदार द्वारा जारी अनुसूचित जन-जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर 18 बिन्दुओं में शिकायत की है।

प्रमाणपत्र फुर्ती से जारी किया गया है। ऋचा जोगी ने जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन 15 जुलाई की शाम 6 बजे जरहागांव तहसीलदार चित्रकांत चाली ठाकुर के दफ्तर में दिया। 17 जुलाई को जरहागांव तहलीलदार ने ऋचा रुपाली साधु, पिता प्रवीण राज साधु, निवासी पेंड्रीडीह तहसील जरहागांव जिला मुंगेली के नाम से अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी कर दिया। ऋचा जोगी अकलतरा से चुनाव लड़ चुकी है। उस समय उन्होंने गोंड जाति का होने का उल्लेख अपने आवेदन में नहीं किया था।
नेताम ने की 18 बिन्दुओं पर शिकायत
स्व. अजीत जोगी के आदिवासी होने की चुनौती देने के लिये बीते 20 सालों से अदालतों में लड़ाई लड़ रहे संत कुमार नेताम इस बार फिर सामने आये हैं। वे अमित जोगी के जाति प्रमाण पत्र को, उनके पिता के जाति प्रमाणपत्र के रद्द होने के बाद शून्य कराने के लिये भी शिकायत कर चुके हैं। इस बार ऋचा रुपाली जोगी के नाम से जारी प्रमाण पत्र की वैधता को भी उन्होंने चुनौती दी है।
नेताम की शिकायत के अनुसार 17 जुलाई 2020 को ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत ऋचा रूपाली साधु उर्फ ऋचा एश्वर्य जोगी को गोंड़ अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र अनुविभागीय अधिकारी मुंगेली के द्वारा जारी किया गया है। नेताम की शिकायत के अनुसार उक्त जाति प्रमाण पत्र गलत तथ्यों और प्रक्रियागत त्रुटि के आधार पर जारी हुआ है। ऋचा रूपाली साधु गोंड जनजाति की सदस्य नहीं है, क्योंकि आवेदन पत्र ऑनलाइन फार्मेट में है इसमें आवेदक के हस्ताक्षर नहीं है। इसमें फोन नंम्बर और ई मेल आई डी किसी अन्य व्यक्ति का है। आवेदन पत्र के साथ संलग्न शपथपत्र में ऋचा रूपाली साधु नाम से आवेदन है जबकि हस्ताक्षर में आर जोगी लिखा है। शपथ पत्र में केवल आवश्यक दस्तावेज लिख दिया है, जबकि दस्तावेज संलग्न नहीं है। यहां हस्ताक्षर भी ऋचा जोगी द्वारा अकलतरा चुनाव के वक्त भरे नामांकन शपथ पत्र से अलग है।
ई मेल आईडी और मोबाइल नंबर भी अलग है। ई मेल आईडी किसी गिरधर मानिकपुरी का है। आवेदन में आधार कार्ड नंवर का उल्लेख भी नहीं है। आवेदक महिला है परन्तु आवेदन पत्र में पति का नाम नहीं दिया गया है। आवेदक का पता ग्राम पेन्ड्रीडीह तहसील मुंगेली दर्शाया गया है और परिवार के मुखिया के रूप में स्वयं ऋचा रूपाली साधु का नाम लिया गया है। आवेदन में आवेदक को पहले भी जाति प्रमाण पत्र जारी होने संबंधी कॉलम में, हां- लिखा है परन्तु उसका कोई व्यौरा अगले कॉलग में नहीं दिया गया है। जाति और निवास साबित करने वाले किस दस्तावेज का अवलंबन लिया गया है उसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। आवेदन पत्र में आवेदक के हस्ताक्षर भी नहीं है। नोटरी मुंगेली के समक्ष भरे गये शपथ पत्र में ऋचा रूपाली साधु ने स्वयं को गोंड अनुसूचित जनजाति का बताते हुए पेन्डीडीह मुंगेली का स्थायी निवासी घोषित किया है परन्तु शपथ पत्र में उक्त ग्राम में कृषि भूमि नहीं होने की बात कही है।
नेताम की शिकायत के अनुसार आवेदन पत्र के साथ संलग्न पटवारी जांच प्रतिवेदन श्रश्मि कांता नाम के आवेदक का है। जो कि 1 मई 2018 तिथि को पटवारी एम.के. पाण्डेय द्वारा जारी किया गया प्रतीत होता है। इस जांच प्रतिवेदन में रश्मि कांता की जाति गोड़ अंकित की गई है, परन्तु उसके निवास का पूरा पता ही नहीं दिया गया है। पटवारी जांच प्रतिवेदन में 1950 के पूर्व उसके माता पिता कहा निवास करते थे इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं दी गई है। पटवारी प्रतिवेदन में स्थायी पते की जगह केवल भिलाई लिखा हुआ है। आवेदक रश्मि कांता ने स्वयं को परिवार का पालक दर्शाया है। कॉलम 7 में आवेदक कितना पढ़ा लिखा और स्कूल में क्या जाति लिखी है उस स्थान पर संदर्भित जानकारी के बजाय पुत्र ऋषभ और पुत्री ऋचा लिखा हुआ है। परिवार का राशन कार्ड नहीं होने की जानकारी है परन्तु उसका कारण नहीं लिखा है।
नेताम का कहना है कि पटवारी प्रतिवेदन जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए एक अत्यन्त महत्वपूर्ण दस्तावेज है जिसे पूर्णत: लापरवाही और त्रुटिपूर्ण तरीके से जारी किया गया है। यह जांच प्रतिवेदन रश्मिकांता के लिए तैयार किया गया था न कि ऋचा रूपाली साधु के लिए। ऋचा रूपाली साघु के प्रकरण में कोई भी पटवारी जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसके बाद भी जाति प्रमाणपत्र का जारी कर दिया गया।
इसी तरह से नेताम ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अनेक बिन्दुओं पर सवाल किये और जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की मांग मुंगेली की जिला स्तरीय छानबीन समिति से की है।
अमित जोगी के पैतरों को नहीं समझ रही कांग्रेस
इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के एक प्रवक्ता शैलेष नितिन त्रिवेदी से बात की गई तो उन्होंने पहले यह कहा कि आप क्या बताना चाहते हैं मुझे समझ में नहीं आ रहा। इसके बाद उन्होंने कहा कि भाजपा और उसकी बी टीम मरवाही में तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। इसी का यह हिस्सा है।
मरवाही चुनाव के लिये कांग्रेस की तरफ से तय किए गए एक प्रभारी प्रदेश महामंत्री अर्जुन तिवारी ने कहा कि यह नया पैंतरा है जिसका अंदाजा हमें पहले से था। अमित जोगी सिर्फ पिता के नाम को भुना रहे हैं। उनके दुव्र्यवहार से बाकी इलाकों की बात क्या करें, जिसे वे अपना गांव बताते हैं वहां के लोग भी गुस्से में हैं। जगह-जगह वे बैठकें कर रहे हैं वहां सब बातें सामने आ रही हंै। यह नया पैंतरा नहीं चलने वाला है।
अमित जोगी ने किया प्रतिवाद
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में अमित जोगी ने कहा कि मेरे पिताजी और मुझसे नहीं निपट पा रहे हैं तो अब मेरे 2 माह के दूध पीते बेटे की मां के पीछे लोग हाथ धोकर पीछे पड़ गये हैं। मेरी धर्मपत्नी के परिवार के लोग पांच दशकों से अनुसूचित जनजाति वर्ग से नौकरियां करते आ रहे हैं। मेरी पत्नी का दोष केवल यह है कि वह अजीत जोगी की बहू है।


