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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 4 अक्टूबर। बस्तर में बरसों से पुलिस जुल्म झेलते आ रही मानवाधिकार कार्यकर्ता सोनी सोरी अभी दो सरकारों के हुक्म के बीच पिस रही है।
उन्हें भाजपा विधायक भीमा मंडावी की नक्सल-हत्या के मामले में एनआईए ने पूछताछ के लिए 25 सितंबर को बुलाया था। एक दिन पहले 24 सितंबर को वे कोरोना पॉजिटिव निकलीं, और उन्होंने इसकी सूचना एनआईए को दे दी। इसके बावजूद एनआईए ने कहा कि वे पूछताछ के लिए पहुंचे। और इसके चार दिन बाद बस्तर के जिला प्रशासन ने उनके खिलाफ क्वॉरंटीन नियमों को तोडऩे का केस दर्ज कर दिया।
समाचार-विचार की अंगे्रजी वेबसाईट द वायर में एक रिपोर्टर सुकन्या शांता ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी लिखी है। रिपोर्ट में सोनी सोरी की कही बात भी लिखी गई है-जब मैंने एनआईए अफसरों को अपने कोरोना पॉजिटिव होने की बात बताई तो उन्होंने इस पर भरोसा करने से मना कर दिया, और मुझे कहा कि मैं 80 किलोमीटर दूर दंतेवाड़ा एनआईए दफ्तर पहुंचूं। उसे कोई वाहन मालिक गाड़ी देना नहीं चाह रहे थे, और ऐसे में वह भारी बुखार के बीच बरसते पानी में मोटरसाइकिल पर अपने भतीजे के साथ गई। वहां उन्होंने मेरी ऐसी हालत के बाद भी 7 घंटे लगातार पूछताछ की।
सोनी सोरी ने बताया कि अब उनके ऊपर संक्रामक रोग महामारी की धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है कि उन्होंने क्वॉरंटीन नियम तोडक़र जन-जीवन खतरे में डाला है।
द वायर संवाददाता ने जब गीदम के स्वास्थ्य अधिकारी देवेंद्र बहादूर सिंह से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज करवाई है क्योंकि सोनी सोरी ने कड़े क्वॉरंटीन के बावजूद सफर किया।
रिपोर्ट में आगे लिखा गया है कि नियमों के मुताबिक एनआईए को पूछताछ करने के लिए सोनी सोरी के घर जाना था, न कि उसे दूसरे शहर बुलाना था, लेकिन एनआईए ने ऐसा किया और सोनी सोरी को कोई यात्रा-भत्ता भी नहीं दिया।


