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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 27 सितंबर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को केन्द्र सरकार के कृषि सुधार बिल और श्रम कानून में संशोधन पर आपत्ति की है। उन्होंने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण पर मीडिया का ध्यान था, ऐसे समय में अध्यादेश लाकर किसानों और श्रमिकों के विरोध में कानून बनाए गए। श्री बघेल ने कहा कि प्रदेश में इसके खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि इस कानून को वापस लेकर केन्द्र सरकार स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करे।
श्री बघेल ने प्रेस कॉफ्रेंस में कृषि सुधार बिल पर कहा कि यह बिल संविधान की मूल भावना के विपरीत है। अभी जो विधेयक पारित किया गया वो राज्य और विधान मंडल का विषय है। इसलिए लोकसभा और राज्यसभा में जो कानून पारित किया गया है। वो असंवैधानिक है। इस बिल से केंद्र ने राज्य सरकार के अधिकारों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने राज्यों के अधिकारों पर कुठाराघात करते हुए यह बिल लाया है, इसका हम विरोध करते हैं। उन्होंने श्रम कानून में संशोधन पर कहा कि केन्द्र ने 3 सौ श्रमिकों वाले कारखानेदार को छंटनी करने की छूट दे दी है। पहले सौ श्रमिकों वाले कारखानों में भी छूट थी। ये बिल भी राज्यों को विश्वास में लिए बिना पास कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों और श्रमिकों के विरोध में कानून बनाए गए। उन्होंने कृषि सुधार बिल पर कहा कि शांताकुमार कमेटी ने वर्ष-2015 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उसके अनुरूप कानून बनाया गया। इस पर राज्यों से चर्चा नहीं की गई। श्री बघेल ने कहा कि देश के लोग कोरोना संकट से जूझ रहे हैं, मीडिया का ध्यान सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण पर था। ऐसे समय में अध्यादेश लाया गया। उन्होंने कहा कि बिल में यह प्रावधान है कि कोई भी किसान कहीं भी अपनी उपज को बेच सकता है। श्री बघेल ने कहा कि इस पर रोक कब थी? पहले से ही बेचने की छूट रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी व्यवसायियों को भंडारण की छूट मिल गई है। दलहन-तिलहन के दाम बढ़ेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार निजी मंडियों को लाकर राज्यों के मंडियों को खत्म करना चाहती है। सभी राज्यों में मंडी कानून बने हुए हैं। जिसके जरिए वहां काम करने वाले हमाल और अन्य लोगों को सरंक्षण मिला हुआ है, यह सब खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि सुधार बिल में कॉट्रेक्ट फार्मिंग पर जोर है। कॉट्रक्ट फार्मिंग सब्जी और फल उत्पादकों के लिए तो फायदेमंद हो सकता है, लेकिन अनाज पैदा करने वालों को नुकसान होगा।
श्री बघेल ने कहा कि पीडीएस सिस्टम को खत्म करने की साजिश है। शांताकुमार कमेटी ने यह कहा है कि किसानों को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की जानकारी नहीं रहती है। मुख्यमंत्री ने इसको पूरी तरह गलत बताया और कहा कि छत्तीसगढ़ में 20 लाख पंजीकृत किसान हैं जिनमें से 98 फीसदी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेची है और राजीव न्याय योजना के जरिए अतिरिक्त राशि भी दी गई है।
उन्होंने कहा कि पीडीएस सिस्टम में ब्लैक मार्केटिंग का जिक्र है। जबकि छत्तीसगढ़ में 66 लाख राशन कार्डधारी हैं, जिन्हें आधार से लिंक किया गया है। शांता कुमार कमेटी में कहा गया है कि निजी लोगों की प्रतिभागिता बधाई जाए, जो कि गलत है। इससे साफ है कि केंद्र सरकार एफसीआई और पीडीएस बंद कर सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस रिपोर्ट से साफ होता है कि ये लोग केवल कॉर्पोरेट का फायदा करना चाहते है। मोदी ने कहा था कि स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करेंगे, पर अब तक नहीं हुआ।


