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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 16 अगस्त। प्रदेश के एक सबसे बड़े आईपीएस अफसर एडीजी जी.पी. सिंह को राज्य शासन ने एक नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा है कि उन्होंने किस अधिकार से एसीबी-ईओडब्ल्यू के कर्मचारियों का तबादला किया था? उल्लेखनीय है कि जब जी.पी. सिंह को अचानक एसीबी-ईओडब्ल्यू से हटाया गया, तो उनका तबादला आदेश आने के बाद पिछली तारीख का एक ऐसा आदेश निकला जिसमें वहां के बहुत से कर्मचारियों का उन्होंने पुलिस मुख्यालय तबादला कर दिया था।
राज्य शासन का कहना है कि इन कर्मचारियों को एसीबी ईओडब्ल्यू में राज्य शासन के आदेश से पोस्ट किया गया था, और शासन ही उन्हें हटा सकता था। अपने पसंदीदा इन लोगों की वहां पर पोस्टिंग जी.पी. सिंह ने ही पहल करके करवाई थी, और अपने हटने के साथ ही उन्होंने उन सबको वहां से हटा दिया था।
पता चला है कि शासन के सर्वोच्च स्तर पर इसे लेकर बड़ी नाराजगी है कि जी.पी. सिंह ने कर्मचारियों को अपने निजी सामान की तरह वहां से हटा दिया। शासन इस बात को भी देख रहा है कि तबादले के एक-दो दिन के पहले की तारीख पर निकला यह आदेश क्या जी.पी. सिंह का तबादला आदेश जारी हो जाने के बाद पिछली तारीख पर निकाला गया है? राज्य शासन ने तबादले के शासन के अधिकार के खिलाफ जाकर एडीजी द्वारा अपने स्तर पर ऐसा आदेश निकालना बहुत गलत माना है और उसी के तहत स्पष्टीकरण मांगा गया है। गृह विभाग ने जी.पी. सिंह को यह नोटिस जारी किया है।
जब जी.पी. सिंह का तबादला हुआ तो उन्होंने 22 लोगों को एसीबी-ईओडब्ल्यू से हटाकर पुलिस मुख्यालय या जिलों में भेज दिया था, और उन्हें कार्यमुक्त भी कर दिया था। लेकिन पुलिस मुख्यालय ने शासन के आदेश बिना किसी को काम पर रखने से मना कर दिया था। इसके बाद काफी जद्दोजहद चलती रही और अभी तीन दिन पहले शासन ने जी.पी. सिंह से स्पष्टीकरण मांगा है।




