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वैवाहिक विवाद में भी बेटी से पिता की मुलाकात नहीं रोकी जा सकती- हाईकोर्ट
18-Jan-2026 12:22 PM
वैवाहिक विवाद में भी बेटी से पिता की मुलाकात नहीं रोकी जा सकती- हाईकोर्ट

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 18 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बच्चों के संरक्षण और माता-पिता के अधिकारों से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि दाम्पत्य विवाद की आड़ में बच्चे को पिता के स्नेह से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए दोनों माता-पिता का भावनात्मक जुड़ाव जरूरी है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने इस मामले में फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया। फैमिली कोर्ट ने पिता को अपनी 10 वर्षीय बेटी से नियमित रूप से मिलने का अधिकार दिया था।

प्रकरण में पत्नी ने फैमिली कोर्ट के आदेश को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि वह अब कोलकाता में रहती है। ऐसे में बच्ची को बार-बार रायपुर लाना व्यावहारिक नहीं है। उसका तर्क था कि यात्रा से बच्ची की पढ़ाई और दैनिक दिनचर्या प्रभावित होगी।

दोनों की शादी 27 अप्रैल 2013 को पहले हिंदू रीति-रिवाजों से और बाद में ईसाई परंपरा के अनुसार हुई थी। वर्ष 2015 में उनकी बेटी का जन्म हुआ। पति वर्तमान में भोपाल में रह रहा है।
पति का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद विवाद शुरू हो गए और जनवरी 2020 में पत्नी मायके चली गई, साथ में बेटी को भी ले गई।

पति ने रायपुर फैमिली कोर्ट में तलाक और बेटी से मिलने के अधिकार के लिए आवेदन दिया था।
वहीं पत्नी की ओर से कहा गया कि ससुराल में उसे प्रताड़ित किया गया और पति के किसी अन्य महिला से संबंध थे। उसका यह भी कहना था कि फैमिली कोर्ट का आदेश लागू होने पर उसे बार-बार यात्रा करनी पड़ेगी, जो बच्ची के हित में नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे का हित सर्वोपरि है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पिता को पूरी तरह अलग कर दिया जाए। अदालत के अनुसार, नियमित मुलाकात से बच्चे का भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है और यह अधिकार केवल दूरी के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता।


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