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कार्यसंस्कृति में शामिल हो सुधार, तभी देश की नंबर-1 कोल कंपनी बनेगी एसईसीएल
18-Jan-2026 1:20 PM
कार्यसंस्कृति में शामिल हो सुधार, तभी देश की नंबर-1 कोल कंपनी बनेगी एसईसीएल

कंपनी के पहले ‘चिंतन शिविर’ में भविष्य की रणनीति पर मंथन, आत्मनिर्भर भारत के ऊर्जा लक्ष्य पर फोकस

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 18 जनवरी। ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने एक नई पहल करते हुए अपना पहला ‘चिंतन शिविर’ आयोजित किया। यह कार्यक्रम मुख्यालय के ऑडिटोरियम में बिलासपुर में संपन्न हुआ।

चिंतन शिविर का उद्देश्य कंपनी की अब तक की उपलब्धियों की गहन समीक्षा करना, मौजूदा कमियों की पहचान करना और उत्पादन, डिस्पैच, सुरक्षा, लागत दक्षता, सतत विकास और डिजिटलीकरण जैसे अहम क्षेत्रों में समयबद्ध कार्ययोजना तय करना रहा।

कार्यक्रम की अगुवाई एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरिश दुहन ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि एसईसीएल को एक बार फिर देश की नंबर-1 कोल कंपनी के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए सुधार सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि संगठन की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनें।

उन्होंने गति, तकनीक और डिजिटल हस्तक्षेप पर जोर देते हुए तेज क्रियान्वयन और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया की आवश्यकता बताई। साथ ही कहा कि उत्पादन के साथ गुणवत्ता बनाए रखना, लागत नियंत्रण और राजस्व वृद्धि पर लगातार काम करना जरूरी है। विजन 2030 और विजन 2047 का उल्लेख करते हुए उन्होंने विविधीकरण, नेट-जीरो रोडमैप और उद्योग से जुड़ाव में आगे रहने की जरूरत पर भी बल दिया।
सीएमडी ने युवा अधिकारियों को कंपनी का भविष्य बताते हुए उनसे एसईसीएल को भविष्य के लिए तैयार संगठन बनाने में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

चिंतन शिविर में निदेशक (तकनीकी–संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास, निदेशक (वित्त) डी. सुनील कुमार, मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन और निदेशक (तकनीकी–परियोजना एवं योजना) रमेश चंद्र महापात्र सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यालय और सभी संचालन क्षेत्रों से करीब 200 अधिकारियों ने शिविर में हिस्सा लिया। इनमें एरिया जनरल मैनेजर, विभागाध्यक्ष और ई-5 स्तर तक के बड़ी संख्या में युवा अधिकारी शामिल थे।

शिविर के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा 15 प्रस्तुतियां दी गईं। इनमें 2047 तक का रोडमैप, भूमिगत उत्पादन योजना, गुणवत्ता नियंत्रण, डिस्पैच, सुरक्षा, भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास, पर्यावरण एवं वन स्वीकृति, डिजिटलीकरण और एआई का उपयोग, मानव संसाधन, वित्त और अनुबंध प्रबंधन जैसे विषय शामिल रहे।
हर सत्र के बाद प्रश्नोत्तर और खुली चर्चा हुई, जिसमें शीर्ष प्रबंधन ने सक्रिय भागीदारी की। इससे विचारों और नवाचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला।


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