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अतिरिक्त वेतन भुगतान के नाम पर वसूली पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 13 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक सेवानिवृत्त प्रधान पाठक के पक्ष में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए उनके खिलाफ की गई वसूली की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता से वसूल की गई राशि तीन महीने के भीतर वापस करें।
बालोद जिले के डौंडी विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला कटरेल के सेवानिवृत्त प्रधान पाठक राम गुलाल साहू 30 जून 2024 को सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति से पहले उनके वेतन से एक लाख 36 हजार 888 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया गया था। विभाग का कहना था कि वेतन निर्धारण में हुई त्रुटि के कारण उन्हें वर्षों तक अधिक वेतन का भुगतान हुआ था, जिसकी भरपाई के लिए राशि काटी गई।
इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने वसूली आदेश को निरस्त करने, काटी गई राशि वापस दिलाने तथा उस पर ब्याज दिए जाने की मांग की थी। याचिका में 8 प्रतिशत ब्याज के साथ वैकल्पिक रूप से 18 प्रतिशत ब्याज देने का भी आग्रह किया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि उनकी प्रारंभिक नियुक्ति सहायक शिक्षक के रूप में हुई थी और वे प्राथमिक शाला प्रधान पाठक के पद से सेवानिवृत्त हुए। दोनों ही पद तृतीय श्रेणी (क्लास-3) के अंतर्गत आते हैं।
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि यदि वेतन निर्धारण में कोई प्रशासनिक त्रुटि हुई भी हो, तो उसका दोष कर्मचारी पर नहीं थोपा जा सकता। विशेष रूप से सेवानिवृत्त अथवा तृतीय श्रेणी कर्मचारियों से अतिरिक्त भुगतान की वसूली करना न्यायिक सिद्धांतों और पूर्व में दिए गए उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के अनुरूप नहीं माना गया है।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने वसूली की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि उनसे वसूल की गई 1.36 लाख रुपये से अधिक की राशि तीन माह के भीतर वापस की जाए।


