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मेडिकल कॉलेज पर घमासान: ओपी के आरोपों पर सिंहदेव का पलटवार
08-Jun-2026 6:38 PM
मेडिकल कॉलेज पर घमासान: ओपी के आरोपों पर सिंहदेव का पलटवार

'छत्तीसगढ़'संवाददाता

अंबिकापुर, 8 जून। सरगुजा संभाग के सबसे बड़े राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन के निर्माण में हो रही देरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश के वित्त मंत्री एवं सरगुजा जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी ने अस्पताल निर्माण में हुई देरी के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इसे वर्तमान सरकार की नाकामी छिपाने का प्रयास बताया है।

सोमवार को सरगुजा दौरे पर पहुंचे ओपी चौधरी ने मीडिया से चर्चा में कहा कि कांग्रेस शासनकाल में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच मतभेदों के कारण मेडिकल कॉलेज अस्पताल परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्राथमिकता देते हुए 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है तथा निर्माण एजेंसी को कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके जवाब में टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार को सत्ता संभाले ढाई वर्ष से अधिक समय हो चुका है। उन्होंने कहा कि ओपी चौधरी स्वयं वित्त मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री हैं, इसके बावजूद अब तक लंबित कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, संचालन, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं की शुरुआत तथा पीजी सीटों की स्वीकृति जैसे महत्वपूर्ण कार्य संपन्न हुए थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार को पूर्व में किए गए कार्यों का भी उल्लेख करना चाहिए।

फंड की कमी से प्रभावित रहा निर्माण
वर्ष 2014 में शुरू हुए मेडिकल कॉलेज के अस्पताल भवन के निर्माण के लिए कांग्रेस शासनकाल में स्वीकृति मिली थी। अब तक इस परियोजना पर लगभग 366 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। हालांकि भवन को पूर्ण करने के लिए आवश्यक अतिरिक्त 119 करोड़ रुपये की स्वीकृति समय पर नहीं मिलने से निर्माण कार्य लंबे समय तक प्रभावित रहा।

एनएमसी मानकों को पूरा करने में चुनौती
अस्पताल भवन अधूरा होने के कारण मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के निर्धारित मानकों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में जिला अस्पताल को संबद्ध अस्पताल के रूप में उपयोग किया जा रहा है, लेकिन उपलब्ध सुविधाएं एनएमसी की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं मानी जा रही हैं।

विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी असर
भवन निर्माण में देरी का असर एमबीबीएस विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। बुनियादी ढांचे की कमी के कारण मेडिकल कॉलेज को दो बार 'जीरो ईयरÓ घोषित किया जा चुका है। अस्पताल भवन तैयार नहीं होने से विद्यार्थियों को क्लीनिकल प्रशिक्षण और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

टेंडर प्रक्रिया पूरी, निर्माण का इंतजार
अस्पताल भवन के शेष कार्यों की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के पास है। शेष निर्माण कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है, लेकिन कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। सरकार का दावा है कि निर्माण कार्य में जल्द तेजी लाई जाएगी और अस्पताल भवन को शीघ्र पूर्ण किया जाएगा।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधूरे निर्माण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। हालांकि दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास और जनता के हित में आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही है।


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