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एम्स में सफल अंगदान-प्रत्यारोपण
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 7 जून। सिर्फ 12 वर्ष की उम्र में दिवंगत सुमना कुंडू अब दो जरूरतमंद मरीजों के जीवन में हमेशा जीवित रहेंगी। मस्तिष्क मृत्यु घोषित होने के बाद उनके माता-पिता ने साहसिक, और संवेदनशील निर्णय लेते हुए उनकी द किडनी (गुर्दे) दान करने की सहमति दी। इस अंगदान के माध्यम से एम्स रायपुर में उपचार रत दो मरीजों को नया जीवन मिला है।
बताया गया कि सुमना कुंडू (12 वर्ष 4 माह) को विगत 29 मई को एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया था। वह पिक्नोडाइसोस्टोसिस के साथ अंतःकपालीय उच्च रक्तचाप एवं दोनों नेत्रों की दृष्टि तंत्रिका क्षीणता जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। लगातार नौ दिनों तक सघन चिकित्सा कक्ष में उपचार एवं कृत्रिम श्वसन सहायता पर रखने के बावजूद चिकित्सकों के अथक प्रयास उन्हें बचा नहीं सके और निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत उन्हें मस्तिष्क मृत घोषित किया गया।
दुःख की इस घड़ी में प्रत्यारोपण समन्वयकों अम्बे पटेल और विनीता पटेल ने परिवार को अंगदान के संबंध में परामर्श दिया। परिवार ने दोनों गुर्दे दान करने की सहमति दी, जिन्हें बाद में राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटो) छत्तीसगढ़ के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रतीक्षा सूची में प्राथमिकता के आधार पर आवंटित किया गया।
पहला गुर्दा रायपुर के टाटीबंध निवासी 15 वर्षीय किशोर में प्रत्यारोपित किया गया, जो पिछले तीन वर्षों से डायलिसिस पर था। दूसरा गुर्दा रायपुर निवासी 45 वर्षीय व्यक्ति में प्रत्यारोपित किया गया, जो मूल रूप से मध्यप्रदेश के बालाघाट का निवासी है और पिछले पांच वर्षों से डायलिसिस पर था। दोनों प्रत्यारोपण सफल रहे तथा दोनों मरीज गुर्दा प्रत्यारोपण सघन चिकित्सा कक्ष में स्वस्थ हो रहे हैं।
प्रत्यारोपण की प्रक्रिया मूत्ररोग विभाग द्वारा डॉ. अमित आर. शर्मा के नेतृत्व में डॉ. दीपक बिस्वाल और डॉ. राघवेंद्र के सहयोग से की गई। इसमें वृक्क रोग विभाग के डॉ. विनय राठौर, और डॉ. नीलम मरावी तथा संज्ञाहरण विभाग की प्रोफेसर मोनिका खेतरापाल और सरिता रामचंदानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह कार्य एम्स रायपुर तथा सोटो छत्तीसगढ़, वृक्क रोग, मूत्ररोग, संज्ञाहरण, तंत्रिका शल्य चिकित्सा, न्यायालयिक चिकित्सा विभाग और बाल सघन चिकित्सा कक्ष के बीच बेहतर समन्वय से संभव हो सका।
इस कठिन परिस्थिति में सुमना के पिता लक्ष्मण कुंडू और माता सरस्वती कुंडू ने समाजहित में अपनी पुत्री के अंगदान का निर्णय लिया। परिवार के इस महान फैसले के बाद एम्स रायपुर की अंग प्रत्यारोपण एवं अंग निष्कर्षण टीम तथा सोटो छत्तीसगढ़ के समन्वय से दोनों गुर्दों का सफल निष्कर्षण और प्रत्यारोपण किया गया।

सोटो छत्तीसगढ़ के संयुक्त संचालक डॉ. वरुण अग्रवाल ने कहा कि अंगदान केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। एक परिवार का निर्णय कई परिवारों के जीवन में नई उम्मीद लेकर आता है।
सोटो छत्तीसगढ़ की जनजागरूकता एवं मीडिया सलाहकार गीतिका ब्रह्मभट्ट त्रिपाठी ने कहा कि सुमना का अंगदान समाज में अंगदान जागरूकता का प्रेरक उदाहरण है, जो लोगों को मृत्यु के बाद भी जीवन बांटने की प्रेरणा देगा।
उन्होंने कहा कि यह अंगदान न केवल दो मरीजों के लिए जीवनदान साबित हुआ, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश भी देता है कि मृत्यु के बाद भी किसी का जीवन अनेक लोगों के जीवन में आशा का प्रकाश बन सकता है।
त्रिपाठी ने कहा कि मानवता के प्रति उनके इस उदार कार्य के सम्मान में दिवंगत आत्मा को सम्मान गारद प्रदान की गई। सुमना अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा दान किए गए अंग दो लोगों की धड़कनों में हमेशा जीवित रहेंगे।


