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उत्तरी छत्तीसगढ़ की रेल परियोजनाएं अब भी फाईलों में, 3 लाईनें सर्वे से आगे नहीं बढ़ीं
‘छत्तीसगढ़’ एक्सक्लूजिव
07-Jun-2026 5:46 PM
उत्तरी छत्तीसगढ़ की रेल परियोजनाएं अब भी फाईलों में, 3 लाईनें सर्वे से आगे नहीं बढ़ीं

  नीति आयोग की बैठक पर निगाहें  

‘छत्तीसगढ़’ एक्सक्लूजिव

रायपुर, 7 जून (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। प्रदेश के उत्तरी इलाकों की रेल परियोजनाओं को लेकर बढ़-चढक़र दावे किए गए, लेकिन वस्तुस्थिति यह है कि तीन बड़ी रेल परियोजनाएं अभी भी सर्वे के स्तर पर ही हैं और चर्चा है कि इन परियोजनाओं से आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद न होने के कारण निकट भविष्य में इनके शुरू होने की संभावना कम है।

हालांकि सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने ‘छत्तीसगढ़’  से चर्चा में कहा कि वो विशेष रूप से अंबिकापुर-बरवाडीह रेल लाईन के लिए प्रयासरत हैं। सर्वे के बाद नीति आयोग की स्वीकृति की जरूरत होगी, और फिर वित्त आदि की मंजूरी के बाद उम्मीद है कि अगले तीन महीने के भीतर परियोजना पर कैबिनेट की मुहर लग जाएगी।

बताया गया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सालभर पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मिलकर अंबिकापुर-बरवाडीह रेल लाइन को मंजूरी देने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि वर्ष-1948 में बरवाडीह रेललाईन को मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पाया। अब आगे काम शुरू होगा। यही नहीं, अंबिकापुर-गढ़वा रोड रेल लाइन और अंबिकापुर-रेणुकूट रेल लाइन भी सरकार की प्राथमिकता में रही हैं। तमाम जनप्रतिनिधि भी उत्तरी इलाकों में रेल सुविधा बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहे हैं। इन रेल परियोजनाओं का सर्वे वर्षों पहले शुरू हो चुका है। दिल्ली में 11 जून को नीति आयोग की बैठक है। चर्चा है कि सीएम विष्णुदेव साय फिर से सरगुजा संभाग की रेल परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए चर्चा कर सकते हैं।

बताया गया कि अंबिकापुर-बरवाडीह (झारखंड) तक रेल लाईन बिछाने के लिए एक दर्जन से अधिक बार सर्वे हो चुका है। रेलवे बोर्ड के एक सलाहकार ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में बताया कि अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों, और सरगुजा के सांसदों ने लगातार इसके लिए मांग रखी थी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 87 सौ करोड़ हो गई है। रमन सिंह सरकार में इसके लिए पहल की गई थी, तब एसईसीएल के सहयोग से रेल परियोजना को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया था, क्योंकि उस इलाके में काफी खदान हैं, मगर बाद में एसईसीएल ने परियोजना से हाथ खींच लिया।

 

अंबिकापुर-बरवाडीह रेल परियोजना को लेकर व्यवहारिक दिक्कत यह है कि पूरा इलाका घने जंगल से घिरा हुआ है। और टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आता है। ऐसे में फॉरेस्ट क्लीरेंस काफी मुश्किल है। इसके अलावा आर्थिक रूप से फायदेमंद न होने की वजह से रेलवे परियोजना को लेकर रूचि नहीं लेता रहा है।

ताजा जानकारी के अनुसार सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई एक जानकारी में रेलवे बोर्ड ने बीते 2 जून को बताया कि अंबिकापुर क्षेत्र की 4 प्रस्तावित रेल लाइन परियोजनाओं में से 3 अभी सर्वे के चरण में हैं और कोई भी परियोजना मंजूरी के अंतिम चरण में नहीं पहुंची है।

रेलवे बोर्ड के अनुसार अंबिकापुर-गढ़वा रोड रेल लाइन परियोजना का सर्वे कार्य पूरा हो चुका है, जबकि अंबिकापुर-रेणुकूट और अंबिकापुर-बरवाडीह रेल लाइन परियोजनाओं का सर्वे अभी प्रगति पर है। इसके अलावा अंबिकापुर-विंढमगंज रेल लाइन परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार होने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन परियोजनाओं को अंतिम स्वीकृति मिलने से पहले संबंधित राज्य सरकारों से परामर्श, नीति आयोग, वित्त मंत्रालय तथा अन्य आवश्यक एजेंसियों की मंजूरी लेना अनिवार्य है। आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद ही इनके निर्माण पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।


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