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नयी दिल्ली, 6 जून । दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन में स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी और अभिभावक पहुंचे तथा कई लोगों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर उनकी चिंताओं ने उन्हें यहां आने के लिए प्रेरित किया।
शनिवार सुबह से जुटनी शुरू हुई भीड़ दिनभर बढ़ती रही।
आंदोलन में शामिल लोगों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि परीक्षाओं को लेकर बार-बार सामने आने वाले विवाद, परिणामों को लेकर अनिश्चितता और अधिकारियों की जवाबदेही की कमी ने व्यवस्था पर उनका भरोसा कमजोर कर दिया है।
कुछ लोगों ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दलों दोनों से निराशा जताते हुए कहा कि युवाओं से जुड़े मुद्दों को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा।
अपनी तीन बेटियों के साथ विरोध प्रदर्शन में पहुंचीं नुसरत परवीन ने कहा कि उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान छात्रों पर पड़ने वाले दबाव को करीब से देखा है।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे बच्चे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और एक अभिभावक के रूप में मैं भी वही दबाव महसूस करती हूं।’’
उनकी बेटी रजदा स्नातक की छात्रा है जबकि इकरा 11वीं कक्षा में पढ़ती है। उन्होंने कहा कि परीक्षा और दाखिले से जुड़ी चिंताएं छात्रों के बीच निरंतर चर्चा का विषय बन गई हैं।
रजदा ने कहा, ‘‘शिक्षा अब पैसे कमाने का जरिया बन गई है।’’
वहीं, इकरा ने भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता की बात कही।
उनकी बहन जिकरा परवीन ने कहा कि छात्र अक्सर संभावित परिणामों के आधार पर अपने भविष्य की योजना बना लेते हैं, लेकिन बाद में नयी अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने अपने अंक जोड़ लिए थे और कॉलेजों के बारे में सोच रहे थे। फिर हमें पता चला कि परीक्षा रद्द कर दी गई है।’’
दिल्ली में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के साथ काम करने वाली वैशाली ने कहा कि भारत अक्सर अपनी युवा आबादी को देश के लिए फायदेमंद बताता है, लेकिन युवाओं की समस्याओं का पर्याप्त समाधान नहीं होता।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, लेकिन उसकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। हमें रचनात्मक बदलाव की जरूरत है।’’
कश्मीर से पहुंचीं विधि पाठ्यक्रम की छात्रा सबरीना अपने छोटे भाई के साथ प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि वह अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे छात्रों के समर्थन में यहां आई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर ज्यादा लोग मिलकर आवाज उठाएंगे तो बात सुने जाने की संभावना भी बढ़ जाएगी।’’
ग्वालियर से बस के माध्यम से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे सौरभ गुर्जर ने कहा कि युवा अब नए विकल्प तलाश रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘छात्रों के साथ जो हो रहा है, वह गलत है। जो पढ़ाई करते हैं वे पीछे रह जाते हैं, जबकि पैसे देने वाले आगे निकल जाते हैं।’’
गुर्जर ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में सीजेपी चुनावी राजनीति में उतरती है तो वह उसका समर्थन करेंगे।
साकेत निवासी कृष्णा ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए नहीं हैं और उनकी रुचि इस बात में है कि सरकारें लोगों की समस्याओं का समाधान करें।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं लोगों की आवाज का समर्थन करता हूं। फिलहाल मुझे किसी भी पक्ष से उम्मीद नहीं है।’’
एमबीए में स्नातक की पढ़ाई कर चुके छतरपुर के धनराज ने भी कहा कि वह ऐसे किसी नए राजनीतिक मंच का समर्थन करेंगे जो टकराव के बजाय सुधारों पर ध्यान दे।
उन्होंने कहा, ‘‘भ्रष्टाचार हर स्तर पर है। हमें सुधार की जरूरत है।’’
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी कर रहे राजू शर्मा ने कहा कि छात्रों को प्रभावित करने वाली लापरवाही के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को भी शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर अधिक मजबूती से आवाज उठानी चाहिए।
हरियाणा के झज्जर से आए स्नातकोत्तर छात्र नीरज ने कहा कि कई युवाओं को लगता है कि न तो सरकार और न ही विपक्ष उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसा आंदोलन चाहते हैं जिस पर भरोसा किया जा सके और जो लोगों के मुद्दों पर काम करे।’’
प्रदर्शन के आयोजन में सहयोग कर रहे स्वयंसेवक रंजीत राज ने कहा कि आंदोलनकारियों में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को लेकर असंतोष एक आम भावना है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर विपक्ष बेहतर काम कर रहा होता, तो शायद इतने लोग यहां नहीं होते।’’
प्रदर्शन में स्वयंसेवक के रूप में मौजूद व्लॉगर राज पटेल ने कहा कि समर्थक चाहते हैं कि ध्यान आंदोलन की आलोचना पर नहीं, बल्कि उठाए जा रहे मुद्दों पर केंद्रित रहे।
प्रदर्शन में कुछ स्कूली छात्र भी शामिल हुए।
दिल्ली के नाथूपुर निवासी तीसरी कक्षा का छात्र अभिमन्यु अपने भाई के साथ आया था।
सातवीं कक्षा के छात्र अद्वैत ने कहा कि छात्र चाहते हैं कि परीक्षा से जुड़े विवाद उनके भविष्य को प्रभावित न करें।
उसने कहा, ‘‘सरकार को छात्रों की सुरक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे विवादों के कारण उनका करियर बर्बाद न हो।’’
अद्वैत के पिता अपूर्व जोठवानी ने कहा कि परीक्षा संबंधी अनिश्चितता परिवारों के लिए भी तनाव का कारण बन गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘अभिभावक भी परेशान हैं। कुछ वर्षों में मेरे बच्चे को भी अपना करियर चुनना होगा।’’ (भाषा)


