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मुंबई में ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 25’ पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक
04-Jun-2026 7:53 PM
 मुंबई में ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 25’ पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक

उच्च शिक्षण संस्थान केवल डिग्री बांटने के केंद्र न रहें, बल्कि उद्योगों की मांग के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करें: बृजमोहन

समिति की बैठक में 'युवा संगम' और 'प्रौद्योगिकी-व्यावसायिक प्रशिक्षण' के जरिए राष्ट्र निर्माण पर हुआ व्यापक मंथन

मुंबई/रायपुर, 4 जून। 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025' पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को मुंबई में हुई। 

 सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, हमारे उच्च शिक्षण संस्थान केवल डिग्री प्रदान करने वाले केंद्र न रहकर नवाचार, अनुसंधान और उद्योगों की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करने वाले उत्कृष्ट संस्थान बनें। 

सांसद बृजमोहन ने बैठक में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों  की भूमिका की सराहना की।

उन्होंने आईआरसीटीसी (IRCTC) द्वारा संचालित 'युवा संगम' कार्यक्रम का विशेष उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए इंटर्नशिप की अनिवार्यता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि आईआरसीटीसी जैसी नवरत्न कंपनियां वैधानिक प्रशिक्षुता अधिनियम और 'प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना' के तहत बड़े पैमाने पर युवाओं को जोड़ रही हैं। वित्त वर्ष 2026-27 (चरण-III) में आईआरसीटीसी द्वारा 75 और प्रशिक्षुओं की नियुक्ति की योजना है, जो युवाओं के रोजगारोन्मुखी कौशल को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।

अनिवार्य इंटर्नशिप  के सवाल पर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स की भागीदारी, हाइब्रिड इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट-आधारित असाइनमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा। यह विधेयक राष्ट्रीय शिक्षा नीति  2020 में उल्लिखित कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण के उद्देश्यों को पूरा करने में बेहद सक्षम सिद्ध होगा।

इस महत्वपूर्ण बैठक में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अध्यक्ष डॉ. डी. पुरंदेश्वरी की अगुवाई में समिति सदस्य सांसद  अनुराग सिंह ठाकुर, सुश्री बांसुरी स्वराज, डॉ. हेमांग जोशी,  ई. टी. मोहम्मद बशीर, प्रो. सौगात राय,  श्रीकांत एकनाथ शिंदे, डॉ. इंद्रा हंग सुब्बा,  प्रदीप कुमार वर्मा, डॉ. मीनाक्षी जैन और श्रीमती सागरिका घोष उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त, विधेयक के प्रावधानों पर व्यावहारिक फीडबैक देने के लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (उच्च शिक्षा विभाग), रेल मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ-साथ महाराष्ट्र सरकार के अधिकारी  मुंबई विश्वविद्यालय, एसएनडीटी विश्वविद्यालय पुणे, वीएनआईटी नागपुर, आईआईआईटी  वडोदरा और आईआईएम  मुंबई के शीर्ष प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया ।


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