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भारतमाला घोटाला: 9.83 करोड़ के फर्जीवाड़े में ईडी ने किया जय प्रकाश गांधी को गिरफ्तार
04-Jun-2026 7:03 PM
भारतमाला घोटाला: 9.83 करोड़ के फर्जीवाड़े में ईडी ने किया जय प्रकाश गांधी को गिरफ्तार

राजमार्ग के लिए अधिग्रहित भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर अधिक मुआवज़ा लेने का आरोप; मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई

रायपुर, 4 जून। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवज़े में कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में  अभनपुर निवासी जय प्रकाश गांधी को गिरफ्तार कर  3 दिन की रिमांड पर लिया है । ईडी की रायपुर जोनल इकाई ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की है।

यह मामला छत्तीसगढ़ की एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें भारतमाला परियोजना के अंतर्गत विकसित किए जा रहे रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण मुआवज़े के वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं।

ईडी के अनुसार जांच में सामने आया है कि जय प्रकाश गांधी ने कथित तौर पर अपने परिवार के कुछ सदस्यों तथा कुछ लोकसेवकों के साथ मिलकर राजमार्ग की अधिसूचित सीमा में आने वाली भूमि खरीदी। इसके बाद उस भूमि को 500 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल वाले छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर दिया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह विभाजन जानबूझकर इस उद्देश्य से किया गया ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से अधिक मुआवज़ा प्राप्त किया जा सके।

ईडी का दावा है कि इस कथित तरीके से आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों ने लगभग 9.83 करोड़ रुपये का मुआवज़ा प्राप्त किया, जबकि वास्तविक रूप से देय राशि लगभग 56.76 लाख रुपये थी। एजेंसी के अनुसार इस प्रकार लगभग 9.27 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) उत्पन्न हुई।

जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस राशि को बाद में शेयरों, म्यूचुअल फंडों तथा अन्य वित्तीय साधनों में निवेश कर वैध दिखाने का प्रयास किया गया।

इससे पहले ईडी ने 28 अप्रैल 2026 को रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले के विभिन्न ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। एजेंसी का कहना है कि तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य साक्ष्य बरामद किए गए, जो कथित मुआवज़ा फर्जीवाड़े से जुड़े हैं।

गिरफ्तार आरोपी को विशेष पीएमएलए अदालत, रायपुर में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया।

ईडी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और इस कथित साजिश में शामिल अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों तथा लोकसेवकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


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