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दहेज प्रताड़ना मामले में हाईकोर्ट की अनोखी शर्त
04-Jun-2026 12:13 PM
दहेज प्रताड़ना मामले में हाईकोर्ट की अनोखी शर्त

एक लाख जमा करने पर ही गिरफ्तारी से मिलेगी राहत

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 4 जून। पारिवारिक विवाद और दहेज प्रताड़ना के एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से राहत देने के साथ एक शर्त भी लगा दी है। अदालत ने कहा है कि पति को पहले हाईकोर्ट के मध्यस्थता केंद्र में एक लाख रुपये जमा करने होंगे। इस राशि की रसीद पुलिस अधीक्षक (एसपी) के समक्ष प्रस्तुत करने के बाद ही गिरफ्तारी पर रोक का आदेश प्रभावी माना जाएगा।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि जमा नहीं की गई तो गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत स्वतः समाप्त हो जाएगी। इतना ही नहीं, इस संबंध में दायर आपराधिक याचिका भी बिना किसी अतिरिक्त आदेश के स्वतः खारिज मानी जाएगी।

मामला सारंगढ़ थाने में दर्ज दहेज प्रताड़ना की एफआईआर का है। शिकायतकर्ता भाव्या गौरहा ने अपने पति अंकुश गौरहा तथा सास-ससुर राकेश गौरहा और रेखा गौरहा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपियों का निवास बिलासपुर के राजकिशोर नगर क्षेत्र में बताया गया है।

एफआईआर दर्ज होने के बाद तीनों आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्राथमिकी रद्द करने और आगे की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि पत्नी द्वारा लगाए गए आरोप निराधार, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण हैं। उनका तर्क था कि शिकायत काफी विलंब से दर्ज कराई गई और उसमें दहेज मांगने या क्रूरता करने के संबंध में कोई स्पष्ट एवं विश्वसनीय आरोप नहीं हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि यह मूल रूप से वैवाहिक विवाद का मामला है। ऐसे मामलों में संबंधों को बचाने और विवाद समाप्त करने के लिए पहले मध्यस्थता का प्रयास किया जाना चाहिए।

इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने पति और पत्नी दोनों को 8 जून 2026 को हाईकोर्ट के मध्यस्थता केंद्र में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। वहां दोनों पक्षों के बीच समझौते और विवाद के समाधान का प्रयास किया जाएगा।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों के बीच अंतिम समझौता हो जाता है तो जमा की गई एक लाख रुपये की राशि को उस समझौते का हिस्सा मानते हुए समायोजित किया जा सकता है।

हाईकोर्ट ने फिलहाल पति, पिता और माता की गिरफ्तारी पर 29 जून 2026 तक अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि अदालत ने यह शर्त भी लगाई है कि सभी याचिकाकर्ता पुलिस जांच में पूरा सहयोग करेंगे।


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