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बेमेतरा के चर्चित हत्या मामले में तीन दोषियों की सजा पर रोक, जमानत पर रिहाई के आदेश
04-Jun-2026 12:10 PM
बेमेतरा के चर्चित हत्या मामले में तीन दोषियों की सजा पर रोक, जमानत पर रिहाई के आदेश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 4 जून। बेमेतरा जिले के चर्चित मारपीट और गैर इरादतन हत्या के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तीन दोषियों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगाते हुए तीनों आरोपियों को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह अंतरिम राहत प्रदान की। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपील के अंतिम निर्णय तक सजा स्थगित रहेगी।

मामला बेमेतरा जिले के नांदघाट थाना क्षेत्र के कटलबोड़ गांव का है। गांव में स्पीड ब्रेकर निर्माण को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के लोगों के बीच मारपीट हुई और कई लोग घायल हुए।

घटना में शिकायतकर्ता पक्ष के युवक टोकेश्वर को गंभीर चोटें आई थीं। इलाज के दौरान घटना के 27 दिन बाद उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले में अन्य धाराएं जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई।

द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, बेमेतरा ने 16 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाते हुए रेखलाल बारले (48), योगेंद्र बारले (25) और नंदू बारले (50) को दोषी ठहराया था।

अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-2 (गैर इरादतन हत्या) के तहत सात वर्ष के कठोर कारावास सहित धारा 147, 148, 323, 324 और 308 के तहत भी सजा सुनाई थी।

फैसले के खिलाफ तीनों दोषियों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दायर की।

अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुनील साहू ने तर्क दिया कि पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि टोकेश्वर की मृत्यु सीधे तौर पर मारपीट में लगी चोटों से नहीं हुई थी।

उन्होंने अदालत को बताया कि झड़प के दौरान टोकेश्वर सड़क पर गिर गया था, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी की डी-4 और डी-6 कशेरुकाओं में फ्रैक्चर हो गया था। इलाज के दौरान उसकी सर्जरी की गई और पीठ में रॉड तथा स्क्रू लगाए गए। बाद में उसे अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई थी।

बचाव पक्ष के अनुसार ऑपरेशन के बाद संक्रमण फैलने से उसके शरीर में सेप्टीसीमिया हो गया और इसी कारण 14 अगस्त 2023 को उसकी मृत्यु हुई। इसलिए धारा 304 भाग-2 का अपराध प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं होता।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि मृतक की मौत घटना के 27 दिन बाद पोस्ट-ऑपरेटिव सेप्टीसीमिया के कारण हुई थी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी पहले ही जेल में पर्याप्त समय बिता चुके हैं।

इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने अपील लंबित रहने तक सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी और तीनों दोषियों को सशर्त जमानत देने का आदेश जारी किया।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि तीनों अपीलकर्ता 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा दो-दो स्थानीय जमानतदार प्रस्तुत करेंगे। उन्हें 6 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट रजिस्ट्री के समक्ष उपस्थित होना होगा और इसके बाद न्यायालय द्वारा निर्धारित तिथियों पर नियमित रूप से पेश होना पड़ेगा।

मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में निर्धारित की गई है।


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