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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 4 जून। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों का सामना कर रहे सेवानिवृत्त खाद्य अधिकारी द्वारिका दास भूतड़ा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की अवकाशकालीन खंडपीठ ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें विशेष न्यायालय द्वारा तय किए गए आरोपों को निरस्त करने की मांग की गई थी।
अदालत ने माना कि मामला भले ही तीन दशक पुराना हो, लेकिन रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि करती है। ऐसे में केवल जांच और आरोप पत्र दाखिल होने में हुई देरी के आधार पर पूरी कार्यवाही समाप्त नहीं की जा सकती।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने वर्ष 1995 में द्वारिका दास भूतड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच में 1 जनवरी 1976 से 13 सितंबर 1995 के बीच उनकी आय और संपत्ति का परीक्षण किया गया।
मामले में राज्य सरकार ने 13 अक्टूबर 2020 को अभियोजन स्वीकृति प्रदान की। इसके बाद जांच पूरी कर आरोप पत्र तैयार किया गया और सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेने के बाद वर्ष 2025 में आरोप तय किए।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वे अब 83 वर्ष के हो चुके हैं और मामले की शुरुआत के लगभग 30 वर्ष बाद आरोप तय किए गए हैं। इसलिए मुकदमे को आगे बढ़ाना निरर्थक होगा। यह भी कहा गया कि जांच एजेंसी यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि जांच इतने लंबे समय तक लंबित क्यों रही और आरोप पत्र इतने वर्षों बाद क्यों दाखिल किया गया।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच में भूतड़ा के पास ज्ञात आय स्रोतों की तुलना में 43 लाख 38 हजार 887 रुपये की अतिरिक्त संपत्ति पाई गई। यह उनकी घोषित आय और व्यय के मुकाबले 303.45 प्रतिशत अधिक थी।
अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि आरोप केवल उनके नाम पर खरीदी गई संपत्तियों तक सीमित नहीं हैं। जांच में यह भी सामने आया कि पत्नी और बच्चों के नाम पर भी कई संपत्तियां, शेयर और डिबेंचर खरीदे गए थे।
खंडपीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट पहले ही आरोपी की डिस्चार्ज आवेदन खारिज कर चुका है। उपलब्ध दस्तावेजों और जांच सामग्री का अध्ययन करने पर प्रथम दृष्टया अभियोजन के समर्थन में पर्याप्त सामग्री दिखाई देती है।
अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट द्वारा 3 मई 2025 और 21 अप्रैल 2026 को पारित आदेशों में कोई कानूनी त्रुटि, अधिकार क्षेत्र संबंधी गलती या प्रक्रिया संबंधी खामी नजर नहीं आती।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों का तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचना जरूरी है। इसलिए संबंधित विशेष न्यायालय को निर्देश दिया गया है कि यदि कोई कानूनी बाधा न हो तो मामले की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी की जाए और किसी भी पक्ष को अनावश्यक विलंब का सामना न करना पड़े।
इस फैसले के साथ सेवानिवृत्त खाद्य अधिकारी द्वारिका दास भूतड़ा के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही जारी रहेगी और अब मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय में आगे बढ़ेगी।


