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कोयला ब्लॉक घोटाला: दिल्ली की अदालत ने नवीन जिंदल और पूर्व कोयला सचिव को समन जारी किया
03-Jun-2026 7:56 PM
कोयला ब्लॉक घोटाला: दिल्ली की अदालत ने नवीन जिंदल और पूर्व कोयला सचिव को समन जारी किया

नयी दिल्ली, 3 जून। दिल्ली की एक अदालत ने छत्तीसगढ़ में ‘गारे पाल्मा 4/1’ कोयला ब्लॉक के आवंटन में कथित अनियमितताओं के आरोप वाले सीबीआई के आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए उद्योगपति एवं लोकसभा सदस्य नवीन जिंदल, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारेख और अन्य को समन जारी किया है।

विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा ने कहा कि यह तात्कालिक आरोपपत्र सीबीआई द्वारा प्राथमिकी दर्ज किए जाने के एक दशक से भी अधिक समय बाद दाखिल किया गया है, जिसे कोयला ब्लॉक मामलों के अब तक के सबसे भारी-भरकम आरोपपत्रों में से एक बताया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अदालत के पास इस मामले में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है।

अदालत ने मेसर्स जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल), इसके प्रबंध निदेशक नवीन जिंदल, पारेख, राकेश कुमार जिंदल, राम किशोर, एस. के. अग्रवाल और मेसर्स जिंदल स्ट्रिप्स लिमिटेड (अब मेसर्स नलवा संस इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड) को समन जारी कर 17 जुलाई को तलब किया है।

यह मामला केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा 26 सितंबर 2012 को दिए गए निर्देशों के आधार पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज की गई प्रारंभिक पड़ताल से संबंधित है।

न्यायाधीश ने कहा कि आरोपपत्र में 778 दस्तावेज शामिल हैं, जो एक लाख से अधिक पृष्ठों में हैं, और इसमें 234 सूचीबद्ध गवाह हैं।

उन्होंने एक जून के संज्ञान आदेश में उल्लेख किया कि भारी-भरकम रिकॉर्ड और कई गवाहों वाली लंबी जांच के अलावा, आरोपी लोकसेवकों के संबंध में सक्षम अधिकारियों द्वारा आवश्यक अभियोजन स्वीकृति देने में लिया गया समय, आरोपपत्र दाखिल करने में हुए अत्यधिक विलंब के प्रमुख कारणों में से एक बताया गया है।

न्यायाधीश शर्मा ने कहा, ‘‘आरोपपत्र में लगाए गए उपरोक्त आरोपों, प्रत्येक आरोपी की विशिष्ट भूमिका और उनके समर्थन में दाखिल किए गए दस्तावेजों, जिनमें गवाहों के बयान भी शामिल हैं, के आलोक में सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक की दलीलों पर विचार करने के बाद... इस अदालत के पास मामले में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है।’’

उन्होंने कहा, “तदनुसार, मैं भादंसं की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) के साथ पठित धारा 409 (लोकसेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी), तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के साथ पठित 13(1)(सी) और 13(1)(डी) के तहत कथित अपराधों और उनसे संबंधित मूल अपराधों पर संज्ञान लेती हूं।”

सीवीसी ने तत्कालीन सांसद संदीप दीक्षित की दो शिकायतें आगे भेजी थीं, जिनमें 1993 से 2005 के बीच 24 कोयला ब्लॉक के आवंटन में अनियमितताओं और धांधली के आरोप लगाए गए थे।

मेसर्स जिंदल स्ट्रिप्स लिमिटेड को आवंटित ‘गारे पाल्मा 4/1 कोयला ब्लॉक’ से संबंधित जांच के आधार पर सीबीआई ने 2014 में आरोपियों के खिलाफ वर्तमान मामला दर्ज किया था। (भाषा)


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