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‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : अपने देश का नाम रौशन करने वाले जापानी, डुबाने वाले हिन्दुस्तानी सैलानी...
03-Jun-2026 5:24 PM
‘छत्तीसगढ़’ का  संपादकीय : अपने देश का नाम रौशन करने वाले जापानी, डुबाने वाले हिन्दुस्तानी सैलानी...

देश के प्रमुख उद्योगपति हर्ष गोयनका सोशल मीडिया पर बड़े सक्रिय रहते हैं, खुद भी लगातार कई सकारात्मक बातें पोस्ट करते हैं, और उन्हें कोई बहुत जरूरतमंद दिख जाते हैं, तो उनकी मदद भी करते हैं। अभी उन्होंने स्विटजरलैंड की एक होटल के मैनेजर का भारतीय पर्यटकों के लिए जारी किया गया एक नोटिस एक्स पर पोस्ट किया है। इस नोटिस में भारतीयों से होटल के कुछ नियमों का पालन करने को कहा गया है। यह कहा गया है कि सुबह के नाश्ते पर जितनी चीजें टेबिलों पर सजाई जाती हैं, वे सिर्फ नाश्ते पर खाने के लिए हैं, उन्हें लपेटकर, बैग में डालकर, लंच के लिए न ले जाएं। अगर उन्हें दोपहर के खाने के लिए कुछ चाहिए, तो उसके लिए अलग से ऑर्डर करें, और उसका भुगतान करें। होटल में ठहरे दूसरे मेहमानों का ध्यान रखते हुए साफ-सफाई और शिष्टता बरतने को भी कहा गया है। यह भी कहा गया है कि पूरी दुनिया से आए हुए मेहमान होटल में रूकते हैं, और उन सबको अच्छा लगेगा, अगर बाकी लोग शांति बनाए रखें। कॉरीडोर और बाल्कनी में धीरे बात करने की सलाह भी दी गई है। होटल का यह नोटिस पोस्ट करते हुए हर्ष गोयनका ने लिखा है कि यह सिर्फ हिन्दुस्तानियों के लिए बनाया गया देखकर वे हक्का-बक्का रह गए, और सिर शर्म से झुक गया। उन्होंने आगे लिखा है कि सोशल मीडिया पर हिन्दुस्तानी किसी रेस्त्रां में गरबा करते दिखते हैं, और किसी एयरपोर्ट पर भी। विमानतलों पर वे जोरों से बातचीत करते हैं, और विमान के भीतर वे पिकनिक मनाने के अंदाज में बर्ताव करते हैं। उन्होंने लिखा कि स्विटजरलैंड के दावोस में उन्होंने एक भारतीय कारोबारी को एक क्लब में इतने जोर से पंजाबी संगीत बजाते हुए देखा कि पूरा शहर उसे सुने। उन्होंने लिखा कि भारत अगर सचमुच एक वैश्विक सुपर पॉवर बनना चाहता है, तो दुनिया के सामने बेहतर बर्ताव रखना होगा। सार्वजनिक जगहों पर हिन्दुस्तानियों की नागरिक जिम्मेदारियों को सुधारने की गंभीर जरूरत है।

किसी भी होटल की लॉबी में गरबा करते हुए लोगों के समूह दिख जाते हैं। अभी एक एयरपोर्ट में विमान के ठीक बगल में दूसरे मुसाफिरों के आने-जाने के बीच में इसी तरह का ग्रुप डांस किया जा रहा था, और दूसरे लोग हक्का-बक्का थे। एक वीडियो चीन की दीवार पर दुनिया भर के पर्यटकों के बीच हिन्दुस्तानियों के गरबा का भी आया है, और इसके लिए जाहिर है कि वे अपना संगीत तो बजाते ही हैं। भारत के भीतर भी एयरपोर्ट पर विमान के इंतजार में संगीत बजाकर दर्जनों लोगों का एक साथ गरबा करना कई जगह देखने में आया है, और गरबा के मौसम से परे भी यह बारहमासी मनोरंजन दूसरों को तकलीफ पहुंचाने की हद तक चलते रहता है। दूसरे देशों में तो घूरते और टोकते हुए लोगों की वजह से हिन्दुस्तानी कहीं-कहीं पर कुछ धीमे भी बोलने लगते हैं, लेकिन हिन्दुस्तान के भीतर तो कोई प्रदेश ऐसा नहीं है जहां के एयरपोर्ट पर मोबाइल फोन पर चीख-चीखकर बात करने वाले लोग न दिखते हों। लोग अपनी पारिवारिक और निजी बातें, कारोबारी, और राजनीतिक बातें, यहां तक कि मोहब्बत और वैध-अवैध संबंधों की बातें, तमाम किस्म की गालियों के साथ दर्जनों और लोगों को सुनाई पड़े, इतनी जोरों से करते हैं। कई लोग किसी एक एयरपोर्ट पर खड़े हुए फोन पर अपने किसी और शहर में होने की झूठी जानकारी देने में भी कोई लिहाज नहीं करते। एक मोबाइल फोन ने लोगों को किसी भी सीमा से परे बदतमीज बनाकर रख दिया है, और सार्वजनिक जगह पर अपनी जिम्मेदारी, और दूसरों के अधिकार का सम्मान इस देश में पश्चिमी संस्कृति के दुष्प्रभाव मान लिए जाते हैं।

भारत से दूसरे देशों में गए हुए पर्यटकों के वीडियो और उनकी कहानियों से सोशल मीडिया लबालब रहता है। देश-विदेश की होटलों के कमरों से चोरी इतनी आम बात है कि उसे हिन्दुस्तानी पर्यटक अपना राष्ट्रीय अधिकार मानकर चलते हैं। एक वीडियो तो किसी देश का ऐसा देखने मिला था जहां होटल के कर्मचारियों ने भारत के एक परिवार से होटल छोड़ते हुए बार-बार अनुरोध किया कि अगर उन्होंने होटल का कोई सामान लिया है, तो कृपया उसे निकाल दें। इस पर वह परिवार होटल के कर्मचारियों पर चीखने लगता है। लेकिन जब सुरक्षा कर्मचारी कार में लद चुका सामान उतरवाते हैं, और एक-एक सूटकेस-बैग को खोलते हैं, तो उसमें से होटल से चुराए गए बिजली के आयरन, हेयरड्रायर से लेकर तकिया, चादर, टेलीफोन, और जाने क्या-क्या सामान निकलते ही चले जाता है। जब चोरी किए गए सामानों का ढेर लग जाता है, और हिन्दुस्तानी परिवार को यह समझ आ जाता है कि अब उन पर कानूनी कार्रवाई तय दिख रही है, तो पूरा परिवार होटल कर्मचारियों के सामने हाथ जोडक़र गिड़गिड़ाने लगता है, माफी मांगने लगता है। यह सिलसिला हिन्दुस्तानी होटलों में ठहरने के दौरान भी चलते रहता है, और दूसरे देशों में जाने के बाद तो वहां कई और किस्म के सामान दिखते हैं, जिन्हें देखते ही लार टपकने लगती है।

दूसरी तरफ जापानी लोग हैं कि दुनिया के किसी देश में जाते हैं, वहां किसी स्टेडियम में अगर जापान की टीम खेल रही है, तो वे मैच खत्म होते ही बड़े-बड़े झोले लेकर पूरे स्टेडियम में किसी भी दर्शक के फेंके गए खाने-पीने के पैकेट-बक्से, और खाली बोतलों को उठाकर सारा कचरा साफ करते हैं, और उसे ले जाकर बाहर छोडऩा अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी मानते हैं। हिन्दुस्तानियों को लेकर दुनिया का तजुर्बा यह रहता है कि वे जहां जाते हैं, गंदगी फैलाते हैं, शोर फैलाते हैं, सार्वजनिक सहूलियतों को चुराने की कोशिश करते हैं। हिन्दुस्तान से कई देशों को जाने वाली उड़ानों में बाथरूम में रखे जाने वाले लिक्विड सोप की बोतल की चोरी देखकर एयरलाईंस बोतल को बिना ढक्कन रखती है, लेकिन मौलिक सूझ-बूझ से संपन्न हिन्दुस्तानी पर्यटक घर से खाली ढक्कन लेकर जाते हैं, और वहां की बोतल में उसे लगाकर तुरंत ही हासिल करने के लिए विमान में चढ़ते ही शौचालय भागते हैं। वहां रखे हुए कागज के नेपकिन को गट्ठा-गट्ठा जेब में भर लेते हैं। जब विमान में चॉकलेट, या शराब की छोटी बोतलें पेश की जाती हैं, तो हिन्दुस्तानी उसे तब तक उठाने में लग जाते हैं, जब तक विमान कर्मचारी उन्हें रोकने न लगें। कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में तो शराब की ऐसी छोटी बोतलों के लिए हिन्दुस्तानी सैलानी गिरोह बनाकर विमान के स्टोररूम पर धावा बोल देते हैं, और वहां से बोतलें लूटकर ले जाते हैं। भारत की संसद में एक बार सरकारी विमान सेवा इंडियन एयरलाईंस के बारे में एक सवाल पूछा गया था कि एक हवाई मुसाफिर औसतन कितनी चॉकलेट लेते हैं, तो वहां 50-60 चॉकलेट प्रति मुसाफिर जैसा कुछ आंकड़ा दिया गया था। एयरहोस्टेस ट्रे में चॉकलेट-पिपरमेंट सर्व करने निकलती थी, तो लोग मुट्ठी में जितनी भर सकते थे, उसे एक साथ उठाकर जेब में रख लेते थे, ताकि घर पहुंचने पर बच्चे कई दिन खुश रह सकें।

 

हर्ष गोयनका, और हमारी तरह के कुछ लोग भारत की इस संस्कृति की आलोचना करते हैं, और पाश्चात्य संस्कृति का बुरा असर यहां भी थोपना चाहते हैं। भारत अपने आम प्रचलित तौर-तरीकों के साथ अब इतनी शोहरत पा चुका है कि वह दुनिया भर में अलग-अलग होटलों में अपने को संबोधित नोटिस पाने लगा है। हिन्दुस्तानी लोग जब किसी होटल का कमरा खाली करते हैं, तो उस कमरे की गहरी छानबीन की जाती है कि वहां से क्या-क्या गायब है। कुछ लोगों ने यह भी लिखा है कि हिन्दुस्तानी सैलानियों का होटलों से चेकआऊट जान-बूझकर धीरे किया जाता है, ताकि होटल कर्मचारी कमरे को ठीक से जांच-परख लें, और देख लें कि उसका कौन-कौन सा सामान वहां ठहरे हुए लोगों के बैग-सूटकेस से बरामद करना है।

विश्वगुरू बनने की चाहत रखने वाले, और इसका दावा करने वाले लोगों को अपने तौर-तरीकों के बारे में सोचना चाहिए।

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