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सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्रों के साथ लिंक वायरल; जांच के लिए बनी समिति
31-May-2026 12:45 PM
सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्रों के साथ लिंक वायरल; जांच के लिए बनी समिति

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 31 मई। देशभर में प्रतियोगी और विश्वविद्यालय परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस के बीच गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) में संभावित प्रश्नपत्र लीक का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर मई 2026 की परीक्षाओं के कुछ प्रश्नपत्रों के साथ ‘समर्थ’ पोर्टल के लिंक प्रसारित होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आशंका जताई जा रही है कि यदि पोर्टल की सुरक्षा में सेंध लगी है तो केवल प्रश्नपत्र ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के अनेक गोपनीय दस्तावेज भी जोखिम में पड़ सकते हैं।

मामले की गंभीरता इस वजह से भी बढ़ गई है क्योंकि ‘समर्थ’ पोर्टल केवल परीक्षा संबंधी कार्यों तक सीमित नहीं है। इसी प्लेटफॉर्म पर प्रवेश प्रक्रिया, वित्तीय लेन-देन, प्रशासनिक रिकॉर्ड, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी सुरक्षित रखी जाती हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनाधिकृत पहुंच व्यापक प्रभाव डाल सकती है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है, जिसे सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि समिति के गठन के 24 घंटे बाद तक जांच प्रक्रिया शुरू नहीं होने की चर्चा भी परिसर में बनी रही। इसी बीच शनिवार को आयोजित अंतिम परीक्षा के प्रश्नपत्र को अचानक बदले जाने की खबर ने मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया।

सीयू मीडिया सेल के प्रभारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने प्रारंभिक जानकारी के आधार पर स्वीकार किया कि कुछ प्रश्नपत्रों के लीक होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने विभाग प्रभावित हुए, कितने प्रश्नपत्र बाहर पहुंचे और इसके पीछे पोर्टल हैकिंग, आईडी-पासवर्ड का दुरुपयोग या कोई मानवीय त्रुटि जिम्मेदार है।

इस घटना ने विश्वविद्यालय की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील परीक्षा प्रणालियों में बहुस्तरीय सुरक्षा, एन्क्रिप्टेड एक्सेस, लॉग मॉनिटरिंग, ओटीपी और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य होती हैं।  

जांच समिति के संयोजक डॉ. एस.सी. श्रीवास्तव बनाए गए हैं। समिति में प्रॉक्टर प्रो. मुकेश कुमार सिंह, प्रो. खेमचंद देवांगन, ओएसडी (डेवलपमेंट) प्रो. भारती अहिरवार और अकादमिक सहायक कुलसचिव टी.पी. सिंह शामिल हैं। समिति को दिल्ली स्थित समर्थ कोर इंजीनियरिंग टीम से यूजर लॉगिन ऑडिट लॉग प्राप्त कर यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है कि कथित रूप से इस्तेमाल किए गए आईडी-पासवर्ड किन आईपी एड्रेस और किन स्थानों से एक्सेस किए गए।

जांच के दायरे में विश्वविद्यालय की आईटी सेल भी रहेगी। समिति यह पता लगाएगी कि कहीं किसी कर्मचारी ने अपने लॉगिन विवरण साझा तो नहीं किए, क्या यह फिशिंग हमले का मामला है, या फिर परिसर नेटवर्क अथवा वाई-फाई के माध्यम से किसी ने अनधिकृत पहुंच बनाई। वेबसाइट के सर्वर लॉग और एडमिन पैनल की भी जांच की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित दस्तावेज कब अपलोड हुए, कितनी बार देखे गए और किन खातों से डाउनलोड किए गए।

कुलसचिव प्रो. अश्विनी दीक्षित ने कहा कि फिलहाल किसी विशेष विषय के प्रश्नपत्र के लीक होने की पुष्टि नहीं हुई है। तथ्यान्वेषी समिति पूरे मामले की जांच कर रही है और रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार विश्वविद्यालय की अंतिम परीक्षा भी सफलतापूर्वक आयोजित कर ली गई है।


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