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डॉ. महंत, बैज और सिंहदेव भी शामिल होंगे
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 23 मई। वन भूमि पर बने जलाशयों में मछली पकड़ने के अधिकार को लेकर छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बड़ा आंदोलन खड़ा करने की तैयारी की जा रही है। आदिवासी, पारंपरिक मछुआरा समुदाय और विस्थापित परिवार राज्य सरकार की ठेका आधारित मत्स्य व्यवस्था के खिलाफ लामबंद हैं। उनका कहना है कि वनाधिकार मान्यता कानून 2006 लागू होने के बाद जलाशयों पर उनके अधिकार स्वतः मान्य हो चुके हैं, इसके बावजूद बाहरी ठेकेदारों को जलाशय सौंपे जा रहे हैं।
इन्हीं मुद्दों को लेकर 24 मई को कोरबा जिले के बूका में राज्य स्तरीय महासम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में हसदेव (मिनीमाता बांगो) जलाशय सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न बड़े जलाशयों से विस्थापित आदिवासी समुदाय, पारंपरिक मछुआरे और मत्स्य समितियां शामिल होंगी। हसदेव क्षेत्र में खनन गतिविधियों का विरोध भी सम्मेलन का प्रमुख मुद्दा रहेगा।
आयोजन समिति और संघर्ष से जुड़े संगठनों का आरोप है कि राज्य सरकार की वर्तमान मत्स्य नीति आदिवासियों और स्थानीय मछुआरा समुदायों के अधिकारों का हनन कर रही है। उनका कहना है कि अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 की धारा 3(1)(घ) और 3(1)(i) के तहत समुदायों को जल, जंगल और वन संसाधनों पर सामुदायिक अधिकार प्राप्त हैं। इसके बावजूद ग्राम सभा की सहमति के बिना जलाशयों को ठेके पर दिया जा रहा है।
आयोजकों का कहना है कि मिनीमाता हसदेव बांगो जलाशय से विस्थापित समुदाय वर्षों से अपने पारंपरिक मत्स्य अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि जलाशयों पर स्थानीय समुदायों की जगह बाहरी ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे लाखों आदिवासी और मछुआरे परिवार आजीविका संकट का सामना कर रहे हैं।
सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत करेंगे। इसके अलावा पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और कोरबा ज्योत्सना महंत भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
सम्मेलन में मत्स्य नीति में तत्काल संशोधन, जलाशयों की ठेका प्रणाली समाप्त करने, विस्थापित आदिवासी एवं स्थानीय मत्स्य समितियों को प्राथमिक अधिकार देने और ग्राम सभा की अनुमति के बिना प्राकृतिक संसाधनों के ठेके पर रोक लगाने जैसी मांगों को लेकर प्रस्ताव पारित किए जाने की संभावना है। आयोजन विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति की ओर से किया जा रहा है।


