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यूएपीए मामलों में बरी होने की संभावना 90 फीसदी से ज्यादा: सुप्रीम कोर्ट
18-May-2026 7:35 PM
यूएपीए मामलों में बरी होने की संभावना 90 फीसदी से ज्यादा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 18 मई को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामलों में दोषसिद्धि की कम दर का संज्ञान लिया. कोर्ट ने कहा कि ऐसे 90 फीसदी से अधिक मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्ल भुइयां की बेंच ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के हवाले से यह टिप्पणी की. 

सुप्रीम कोर्ट ने कुपवाड़ा जिले के एक व्यक्ति को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की. उनके खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था और वह जून, 2020 से जेल में थे. उनके खिलाफ नार्को-टेररिज्म के एक मामले में मुकदमा चलाया जाना था. उन्हें जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी को लंबे समय तक जेल में रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती. 

इस दौरान कोर्ट ने कहा, “राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे मामलों में दोषसिद्धि की दर 2-6 फीसदी है, यानी ऐसे मामलों में बरी होने की संभावना 94 से 98 फीसदी है.” कोर्ट ने आगे कहा, “जहां तक केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की बात है, वहां दोषसिद्धि की वार्षिक दर हमेशा एक फीसदी से भी कम रही है. इसका मतलब है कि ऐसे मामलों में मुकदमे के अंत में बरी होने की संभावना 99 फीसदी है.”  (dw.com/hi)


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