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महिलाओं को एक जून से 3,000 रु प्रतिमाह की सहायता देने वाली 'अन्नपूर्णा' योजना को मंजूरी
18-May-2026 8:24 PM
महिलाओं को एक जून से 3,000 रु प्रतिमाह की सहायता देने वाली 'अन्नपूर्णा' योजना को मंजूरी

कोलकाता, 18 मई (भाषा)। पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल ने सोमवार को फैसला किया कि इमामों, मुअज्जिनों और पुरोहितों के लिए धार्मिक आधार पर जारी सहायता संबंधी योजनाएं इस वर्ष जून से बंद कर दी जाएंगी।

राज्य की पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार की अधिसूचना के अनुसार, सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग तथा अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के तहत धर्मगुरुओं को दिया जाने वाला मानदेय उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को समर्थन देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

राज्य की महिला, बाल एवं सामाजिक कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा‘‘मंत्रिमंडल ने धार्मिक वर्गीकरण पर आधारित योजनाओं को बंद करने को मंजूरी दे दी है। इस संबंध में जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी।’’ उन्होंने संकेत दिया कि इस योजना के लिए मौजूदा राज्य बजटीय आवंटन भी रद्द किए जा सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के लिए चल रही किसी भी छात्रवृत्ति योजना को बंद नहीं किया जाएगा।

इस साल मार्च में राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार द्वारा धार्मिक नेताओं के मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी के बाद, पश्चिम बंगाल के पंजीकृत मस्जिदों के इमामों को 3,000 रुपये प्रतिमाह की राशि दी गई, जबकि मुअज्जिनों और पुरोहितों को 2,000 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए गए।

पश्चिम बंगाल की महिलाओं को अधिक वित्तीय सहायता देने के भाजपा के चुनाव पूर्व वादों पर कार्रवाई करते हुए, मंत्रिमंडल ने ‘अन्नपूर्णा’ योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत एक जून से उन्हें 3,000 रुपये की मासिक सहायता दी जाएगी। साथ ही राज्य द्वारा संचालित बसों में उनके मुफ्त यात्रा के लिए सैद्धांतिक मंजूरी भी दी गई।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की दूसरी बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में, महिला, बाल एवं सामाजिक कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने मौजूदा राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची को कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक फैसले के आधार पर रद्द किए जाने की घोषणा की।

मंत्री ने यह भी बताया कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में संशोधन के लिए सातवें राज्य वेतन आयोग के गठन को भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है।

उन्होंने, हालांकि, इसकी पुष्टि भी की कि राज्य कर्मचारियों को बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता (डीए) देने का मुद्दा सोमवार की बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं था।

पॉल ने कहा, ‘‘मंत्रिमंडल ने एक जून से महिलाओं को 3,000 रुपये मासिक सहायता देने वाली ‘अन्नपूर्णा’ योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। जो लाभार्थी पहले की सरकार की ‘लक्ष्मीर भंडार’ योजना के तहत सहायता प्राप्त कर रहे हैं, वे स्वतः ही ‘अन्नपूर्णा योजना’ के तहत पात्र होंगे। इसके लिए उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। धनराशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी।’’

उन्होंने बताया कि सरकार जल्द ही एक वेब पोर्टल शुरू करेगी ताकि जिन महिलाओं को अब तक यह सहायता नहीं मिली है, वे नए आवेदन कर सकें।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘‘जो महिलाएं संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन कर चुकी हैं और जिन्होंने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए न्यायाधिकरण में अपील की है, वे भी इस योजना के लाभ के लिए पात्र होंगी।’’

पॉल ने बताया कि मंत्रिमंडल ने एक जून से सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि हालांकि बसों के बेड़े में तत्काल विस्तार की कोई योजना नहीं है।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन के लिए सातवें राज्य वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि इसका दायरा नगर निकायों, स्थानीय निकायों, शिक्षा बोर्ड और राज्य संचालित शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों तक भी बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आयोग के गठन का विवरण जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा। हालांकि इसके लागू होने की तारीख स्पष्ट नहीं की गई।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने चुनावी अभियान में वादा किया था कि नया वेतन आयोग राज्य में सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर लागू किया जाएगा।

मंत्रिमंडल के एक अन्य अहम निर्णय की घोषणा करते हुए पॉल ने कहा कि नई भाजपा सरकार राज्य की मौजूदा ओबीसी सूची को 2024 के कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप रद्द करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘मंत्रिमंडल ने राज्य की ओबीसी सूची की समीक्षा करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत उस सूची में वर्गों के ऐसे वर्गीकरण तथा पश्चिम बंगाल सरकार के अधीन सेवाओं और पदों में ओबीसी आरक्षण के प्रतिशत को समाप्त किया जाएगा। यह निर्णय कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 22 मई 2024 के फैसले के अनुसार लिया गया है।’’

मंत्री ने बताया कि राज्य ओबीसी श्रेणी की पात्रता तय करने के लिए एक समिति गठित की जाएगी।

राज्य में ओबीसी सूची विवाद 77 समुदायों को सूची में शामिल करने से जुड़ा है, जिनमें से 75 मुस्लिम समुदाय से हैं। यह प्रक्रिया तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू हुई थी।

इस निर्णय को लेकर बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद उत्पन्न हुआ था, जिसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय ने संबंधित अधिसूचना को रद्द कर दिया और 2010 के बाद राज्य द्वारा जारी लगभग 5 लाख जाति प्रमाणपत्रों को अवैध घोषित कर दिया।


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