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सड़क हादसे में मौत के बाद पॉलिसी को लैप्स बताकर ठुकराया था
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 17 मई। जीवन बीमा पॉलिसी के ग्रेस पीरियड की गलत गणना कर दावे को खारिज करना एलआईसी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी मानते हुए मृतक के परिजन के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने एलआईसी को ब्याज सहित 9 लाख रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक प्रताड़ना और वाद व्यय की राशि भी देने को कहा गया है।
मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य पूर्णिमा सिंह ठाकुर और आलोक पांडेय की पीठ ने की।
मदनपुर निवासी सनत कुमार वैष्णव ने सितंबर 2023 में एलआईसी की जीवन लक्ष्य पॉलिसी ली थी। 27 जनवरी 2025 को एनएच-130 पर हुए सड़क हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद उनके भाई और नामिनी प्रदीप कुमार ने बीमा दावा प्रस्तुत किया, लेकिन एलआईसी ने भुगतान से इनकार कर दिया।
एलआईसी का तर्क था कि प्रीमियम जमा नहीं होने के कारण पॉलिसी 26 जनवरी 2025 को ही लैप्स हो चुकी थी। कंपनी के अनुसार, पॉलिसी की तिमाही किस्त 28 दिसंबर 2024 को देय थी और 30 दिन का ग्रेस पीरियड 26 जनवरी को समाप्त हो गया था। चूंकि मौत 27 जनवरी को हुई, इसलिए जोखिम कवर लागू नहीं माना गया।
सुनवाई के दौरान आयोग ने एलआईसी की पूरी गणना को गलत ठहराया। आयोग ने कहा कि ग्रेस पीरियड की गणना करते समय देय तिथि वाले पहले दिन को नहीं जोड़ा जाता। सामान्य धाराएं अधिनियम, 1897 की धारा 9 का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि दिनों की गणना में पहला दिन बाहर रखा जाता है।
आयोग के मुताबिक यदि 28 दिसंबर को गणना से बाहर रखा जाए, तो 30 दिन का ग्रेस पीरियड 27 जनवरी 2025 की मध्यरात्रि तक प्रभावी था। ऐसे में 27 जनवरी की शाम 7:15 बजे हुई मृत्यु के समय पॉलिसी पूरी तरह सक्रिय थी और बीमित व्यक्ति जोखिम कवर का हकदार था।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि एलआईसी अधिकारियों ने ग्रेस पीरियड तय करने में कानूनी त्रुटि की। इसी आधार पर दावा अस्वीकार करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
आयोग ने एलआईसी को 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार कंपनी को मूल बीमित राशि, दुर्घटना मृत्यु लाभ और टीए राइडर सहित कुल 9 लाख रुपए अदा करने होंगे। इसके अलावा 17 नवंबर 2025 से भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपए अलग से देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मालूम हो कि बीमा क्षेत्र में ग्रेस पीरियड वह अतिरिक्त समय होता है, जो प्रीमियम जमा करने की अंतिम तिथि गुजर जाने के बाद कंपनी की ओर से दिया जाता है। इस अवधि में बिना लेट फीस के प्रीमियम जमा किया जा सकता है और पॉलिसी पूरी तरह चालू मानी जाती है। यदि इस दौरान बीमाधारक के साथ कोई दुर्घटना या अप्रिय घटना हो जाती है, तो बीमा कंपनी दावा खारिज नहीं कर सकती।


