ताजा खबर

नौकरी के इंतजार में बीते कई साल, हाईकोर्ट ने बैंक को लगाई फटकार
17-May-2026 12:32 PM
नौकरी के इंतजार में बीते कई साल, हाईकोर्ट ने बैंक को लगाई फटकार

अनुकंपा मामले में पद खाली नहीं होने का बहाना स्वीकार्य नहीं- हाईकोर्ट

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 17 मई। अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बैंक के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने के बाद उसके आश्रित द्वारा समय सीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बावजूद केवल पद रिक्त नहीं होने का हवाला देकर नियुक्ति से इनकार करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनादी शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पिता छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक में ऑफिस अटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे और सेवा के दौरान ही उनका निधन हो गया था। पिता की मृत्यु के दो महीने के भीतर ही याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत कर दिया था, लेकिन बैंक ने वर्षों तक मामले को लंबित रखा और बाद में यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि संबंधित पद रिक्त नहीं है।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता शर्मा ने दलील दी कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ गया था। ऐसे मामलों में बैंक की अपनी नीति स्पष्ट रूप से कहती है कि आश्रित परिवारों के मामलों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए और उन्हें प्राथमिकता दी जाए। इसके बावजूद बैंक ने मामले को वर्षों तक लंबित रखा।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि इसी दौरान समान परिस्थितियों वाले अन्य मामलों में बैंक ने निर्णय लेकर नियुक्तियां भी प्रदान कीं, जबकि इस मामले में तकनीकी आधारों का सहारा लेकर आवेदन को टालते हुए अंततः अस्वीकार कर दिया गया।

अदालत में यह तर्क भी रखा गया कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उत्पन्न रिक्ति और समय पर प्रस्तुत आवेदन को नजरअंदाज कर केवल प्रशासनिक कारणों और तकनीकी बहानों के आधार पर राहत से वंचित नहीं किया जा सकता। बैंक का यह दावा कि कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं था, न केवल तथ्यात्मक स्थिति के विपरीत है बल्कि उसकी अपनी अनुकंपा नियुक्ति नीति की भावना के भी खिलाफ है।

सिंगल बेंच ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कहा कि संवेदनशील मामलों में संस्थागत जिम्मेदारी का पालन आवश्यक है और आश्रित परिवारों को अनावश्यक देरी व औपचारिकताओं के जाल में नहीं फंसाया जा सकता। मामले में राहत देते हुए हाईकोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्ति प्रदान की जाए।

 


अन्य पोस्ट