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रिहाई पर संशय बरकरार
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 5 मई। छत्तीसगढ़ के निलंबित आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को कथित झारखंड शराब घोटाले में एकड़ राहत मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी है। एकल पीठ के न्यायाधीश पी पी साहू ने आदेश दिया कि टुटेजा को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो सक्षम जमानतदारों पर रिहा किया जाए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि टुटेजा को जांच एजेंसियों के साथ पूर्ण सहयोग करना होगा। साथ ही, उन्हें गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने से सख्ती से मना किया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि वे जांच में सहयोग नहीं करते हैं, तो एजेंसी उनकी जमानत निरस्त कराने का आवेदन करने के लिए स्वतंत्र होगी।
गौरतलब है कि करीब एक सप्ताह पहले ही हाईकोर्ट ने डीएमएफ घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। ऐसे में, इस नए मामले में जमानत मिलने के बावजूद उनकी तत्काल रिहाई आसान नहीं मानी जा रही है।
आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने टुटेजा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और आईपीसी की धारा 420 व 120बी के तहत अपराध दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर झारखंड में अवैध शराब कारोबार के लिए सिंडिकेट तैयार किया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ की तर्ज पर झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव कराया। इसके जरिए कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया और करोड़ों रुपये का अवैध कमीशन कमाया गया।
अपनी अग्रिम जमानत याचिका में टुटेजा ने इसे एवरग्रीन अरेस्ट की साजिश बताया। उनका आरोप है कि जब भी किसी मामले में जमानत मिलने की संभावना बनती है, तब उन्हें जेल में बनाए रखने के लिए नया केस दर्ज कर दिया जाता है।
इस मामले में झारखंड पुलिस ने अलग
एफआईआर दर्ज की है, लेकिन उसमें टुटेजा को आरोपी नहीं बनाया गया है। यही तर्क उनकी जमानत का प्रमुख आधार बना।
हालांकि हाईकोर्ट से राहत मिल गई है, लेकिन अन्य लंबित मामलों और जांच के चलते उनकी तत्काल रिहाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।


