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अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपती को ऑनर किलिंग की आशंका
28-Apr-2026 11:52 AM
अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपती को ऑनर किलिंग की आशंका

हाईकोर्ट का मिला संरक्षण, कोरबा पुलिस को निर्देश, परिजनों को हिदायत दी  

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 28 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंतरजातीय विवाह करने वाले एक नवविवाहित जोड़े की सुरक्षा का आदेश जारी करते हुए कोरबा के पुलिस अधीक्षक और संबंधित थाना प्रभारी को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि दंपती के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें दंपती ने ऑनर किलिंग की आशंका और झूठे आपराधिक मामलों में फंसाए जाने का डर जताया था।

कोरबा जिले के कटघोरा निवासी चिंटू अग्रवाल और अंजलि शर्मा ने अधिवक्ता विवेक अग्रवाल के माध्यम से याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि दोनों पड़ोसी थे और लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे। इसी दौरान उनके बीच सहमति से प्रेम संबंध विकसित हुआ और उन्होंने विवाह का निर्णय लिया। परिजनों के विरोध के चलते दोनों ने 27 फरवरी 2026 को जयपुर (राजस्थान) में आर्य समाज के माध्यम से विवाह किया और बाद में विधिवत पंजीयन भी कराया। विवाह के समय दोनों बालिग थे और कानूनन शादी करने के लिए सक्षम थे।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, शादी के बाद अंजलि के परिवार की ओर से लगातार धमकियां दी जा रही हैं, जिनमें ऑनर किलिंग और झूठे केस में फंसाने की बात शामिल है। उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत भी दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे वे भय के माहौल में जी रहे हैं।

राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिका में किसी संज्ञेय अपराध का स्पष्ट उल्लेख नहीं है और आरोप सामान्य व अस्पष्ट हैं। इसलिए याचिका में ठोस आधार का अभाव है।

हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को दरकिनार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि दंपती के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज होती है, तो उसकी तुरंत जांच की जाए और कानून के अनुसार आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएं।

खंडपीठ ने पक्षकार बनाए गए दंपती के परिजनों को निर्देश दिया कि वे नवदंपती के वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करें।


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