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संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालीना बेयरबॉक एक दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं. इस दौरान वह विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाक़ात करेंगी.
यूएन की वेबसाइट के मुताबिक़, बेयरबॉक विदेश मंत्री जयशंकर से द्विपक्षीय वार्ता करेंगी. वह भारत के एआई रेगुलेशन और गवर्नेंस मॉडल को समझने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिनिधियों से भी मुलाक़ात करेंगी.
संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष यूएन हाउस में प्रेस कॉन्फ़्रेंस भी करेंगी. इसके अलावा वह एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दौरा करेंगी. इसके बाद वह चीन के दौरे पर रवाना होंगी.
इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी पिछले हफ़्ते बयान जारी कर एनालीना बेयरबॉक की यात्रा की जानकारी दी थी.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, विदेश मंत्री जयशंकर के बुलावे पर बेयरबॉक 28 अप्रैल को भारत दौरे पर रहेंगी.
मंत्रालय का कहना है कि इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री और महासभा अध्यक्ष आपसी हितों से जुड़े बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे.
विश्व हिन्दू परिषद की क्या मांगें?
इस बीच, विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) ने बेयरबॉक को पत्र लिखकर 'पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचारों और धर्मांतरण' का मुद्दा उठाया है.
ये पत्र विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने लिखा है.
आलोक कुमार ने पत्र के ज़रिए चार मांगे रखी हैं. इसमें उन्होंने "जबरन धर्मांतरण और अल्पसंख्यकों पर हिंसा की स्वतंत्र और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच, पीड़ितों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था" जैसी मांगें रखीं.
इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश से "अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप जवाबदेही तय करने और महिलाओं और नाबालिग़ों की सुरक्षा के लिए सख़्त क़ानूनी और संस्थागत उपाय लागू करने" की मांग की.
अतीत में भारत सरकार ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को लेकर संसद में बयान दिया था.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी में दिसंबर 2024 को छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्द्धन सिंह ने लोकसभा में कहा था कि साल 2024 में 8 दिसंबर तक बांग्लादेश में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों के ख़िलाफ़ हिंसा की 2,200 घटनाएं हो चुकी हैं.
उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाओं के आंकड़े भी दिए.
बांग्लादेश ने 'अल्पसंख्यक उत्पीड़न' पर भारत की संसद में पेश किए गए आंकड़ों और उस पर आधारित भारतीय मीडिया में छपी कई रिपोर्टों का विरोध किया था.
तत्कालीन अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार की प्रेस विंग ने कहा, "जानकारी भ्रामक और बढ़ा-चढ़ा कर पेश की गई है" (bbc.com/hindi)


