ताजा खबर

औद्योगिक प्रदूषण से बीमार हो रहे श्रमिक, हाईकोर्ट ने प्रशासन को पुराने आदेशों के पालन का निर्देश दिया
28-Apr-2026 11:52 AM
औद्योगिक प्रदूषण से बीमार हो रहे श्रमिक, हाईकोर्ट ने प्रशासन को पुराने आदेशों के पालन का निर्देश दिया

फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और ठेका प्रणाली पर भी जताई चिंता

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 28 अप्रैल। औद्योगिक प्रदूषण के कारण श्रमिकों के बीमार पड़ने के मामलों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। अदालत ने प्रशासन को पूर्व में दिए गए आदेशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 12 मई को तय की है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े किए। कोर्ट कमिश्नर ने बताया कि राज्य में सैकड़ों स्टील और स्पंज आयरन प्लांट संचालित हैं, जहां हजारों श्रमिक कार्यरत हैं। इन श्रमिकों को कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के कर्मचारियों की तरह ही स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट कमिश्नर ने बताया था कि अधिकांश कारखानों में श्रमिकों को अस्थायी या ठेका आधार पर रखा जाता है। इस वजह से वे बार-बार नौकरी बदलते हैं और हर नए प्लांट में जॉइनिंग के समय मेडिकल जांच करानी पड़ती है। हालांकि, समय बचाने के लिए कई उद्योग या तो इन जांचों को नजरअंदाज कर देते हैं या फिर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर श्रमिकों को काम पर रख लेते हैं। कोर्ट कमिश्नर ने सुझाव दिया कि यदि श्रमिकों को आधार कार्ड की तरह एक यूनिक पहचान संख्या दी जाए, तो बार-बार मेडिकल जांच की जरूरत नहीं पड़ेगी और उनकी स्वास्थ्य जानकारी भी सुरक्षित रह सकेगी।

कोर्ट कमिश्नर पलाश तिवारी ने निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों द्वारा जारी मेडिकल रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अधिकांश केंद्र टेम्पलेट आधारित (साइक्लोस्टाइल) रिपोर्ट जारी करते हैं, जिससे उनकी प्रमाणिकता संदिग्ध हो जाती है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि वह पहले से जारी आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की गई है।


अन्य पोस्ट