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भारत की एक अदालत ने रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किए गए रिलायंस और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के दो अधिकारियों की हिरासत 6 मई तक बढ़ा दी है. सीबीआई का आरोप है कि इन दोनों अधिकारियों ने एस्टेरिया एयरोस्पेस के ड्रोन आयात से संबंधित तीन आवेदनों को मंजूरी देने के लिए करीब 15 लाख रुपये की रिश्वत के लेन-देन की योजना बनाई थी.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, डीजीसीए के डिप्टी डायरेक्टर जनरल मुदावाथ देवुला और रिलायंस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट भरत माथुर को गिरफ्तार किया गया है. सीबीआई के मुताबिक, डीजीसीए अधिकारी पर आरोप हैं कि उन्होंने डीजीसीए के पास लंबित आवेदनों को मंजूरी देने के लिए अनुचित लाभ की मांग की.
रिलायंस ने कहा है कि माथुर सिर्फ एक सलाहकार के तौर पर काम कर रहे थे और कंपनी को किसी अवैध लेन-देन की जानकारी नहीं है और न ही ऐसे किसी लेन-देन की मंजूरी दी गई. एस्टेरिया एयरोस्पेस एक ड्रोन कंपनी है, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी जियो प्लेटफॉर्म की है, जो अरबपति मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का हिस्सा है. (dw.com/hi)


