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सुरक्षा राशि भी जब्त, कहा- निजी हित को जनहित बताने की कोशिश
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 25 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर के निषादपारा स्थित लेमहाई तालाब में सीवेज पानी छोड़े जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिका में जनहित का आवरण ओढ़कर निजी विवाद को पेश किया गया है, जो न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
यह याचिका महादेव घाट रोड निवासी अजय कुमार निषाद ने दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि वार्ड क्रमांक 79 (माधवराव सप्रे वार्ड) स्थित लेमहाई तालाब में लगातार बिना उपचारित सीवेज पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे यह सार्वजनिक जलस्रोत प्रभावित हो रहा है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि यह मामला वास्तविक जनहित से अधिक निजी हित से जुड़ा हुआ है। रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता स्वयं इस तालाब के मछली पालन के ठेके के लिए निविदा प्रक्रिया में शामिल हुए थे और एल-वन (सबसे कम बोलीदाता) घोषित किए गए थे।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि याचिका में किसी व्यापक सार्वजनिक नुकसान का ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप की आवश्यकता बनती हो।
हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जनहित याचिका के नाम पर अदालत की असाधारण अधिकारिता का दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर याचिका को खारिज करते हुए 50,000 की कास्ट लगाई गई।
साथ ही, 23 मार्च 2026 को याचिका दाखिल करते समय जमा की गई 15,000 रुपये की सुरक्षा राशि को भी फॉरफिट करने का निर्देश दिया गया।


