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सखी सेंटर में रखी गई विवाहिता की तत्काल रिहाई का आदेश
25-Apr-2026 11:56 AM
सखी सेंटर में रखी गई विवाहिता की तत्काल रिहाई का आदेश

हाईकोर्ट ने कहा- बालिग युवती को अपनी मर्जी से जीने और रहने का अधिकार

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 25 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि किसी भी बालिग व्यक्ति की स्वतंत्रता को उसकी इच्छा के विरुद्ध सीमित नहीं किया जा सकता। प्रेम विवाह के बाद सखी सेंटर में रखी गई एक युवती की रिहाई को लेकर दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से उसे मुक्त करने के निर्देश दिए।

मामले में याचिकाकर्ता ने अपनी पत्नी को सखी सेंटर में रखे जाने को अवैध बताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि युवती की उम्र करीब 22 वर्ष है और वह अपने विवाह, निवास और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम है।

प्रकरण के अनुसार, वर्ष 2024 में दोनों के बीच संबंध विकसित हुए और 24 नवंबर 2025 को कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह संपन्न हुआ। युवती के परिवार ने जातिगत कारणों से इस विवाह का विरोध किया।

फरवरी 2026 में जब युवती को अपनी गर्भावस्था का पता चला और उसने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी, तब आरोप है कि उस पर जबरन गर्भपात कराया गया, जिससे उसे शारीरिक और मानसिक आघात पहुंचा। इसके बाद भी उस पर पति से संबंध खत्म करने का लगातार दबाव बनाया जाता रहा। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि अप्रैल 2026 में युवती के परिजनों ने उसे बहाने से रायपुर ले जाकर एक कमरे में बंद कर दिया और उससे संपर्क के सभी माध्यम छीन लिए। उस पर अपनी जाति में विवाह करने का दबाव डाला गया। पुलिस से मदद मांगने के बावजूद उसे शुरुआती स्तर पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल सकी। इसके अलावा, कुछ लोगों द्वारा युवती पर हमला करने और याचिकाकर्ता को जान से मारने की धमकी देने के भी आरोप लगाए गए।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि युवती ने अपनी इच्छा से विवाह किया है और याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। ऐसे में उसे नारी निकेतन या सखी सेंटर में रखने का कोई वैध आधार नहीं बनता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी बालिग की स्वतंत्रता को उसकी मर्जी के खिलाफ सीमित करना कानून के विरुद्ध है। कोर्ट ने युवती को तुरंत रिहा करने और उसे अपनी पसंद के स्थान पर रहने की पूर्ण स्वतंत्रता देने के निर्देश दिए गए।


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