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फिजी में एक ऑस्ट्रेलियाई अरबपति की कचरे से बिजली बनाने की योजना को लेकर विवाद बढ़ गया है. गांव वालों और देश के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने इसे “कचरा उपनिवेशवाद” यानी ‘वेस्ट कॉलोनियलिज्म’ बताया है और चेतावनी दी है कि इससे देश की “बीच पैराडाइज” वाली छवि खराब हो सकती है. जमीन के मालिक इनोके टोरा मंगलवार को राजधानी सुवा पहुंचे, जहां उन्होंने गांव वालों की ओर से इस 63 करोड़ डॉलर की परियोजना के खिलाफ याचिका सौंपी. इस प्लांट में हर साल लगभग नौ लाख टन ऐसा कचरा जलाने की योजना है, जिसे रिसाइकल नहीं किया जा सकता. इस प्लांट को नादी के पास बनाया जाएगा, जो फिजी का प्रमुख पर्यटन केंद्र है.
इस परियोजना के पीछे ऑस्ट्रेलिया के इयान मलूफ और रॉब क्रॉम्ब हैं, जो दावा करते हैं कि इससे देश की 40 प्रतिशत बिजली जरूरत पूरी हो सकती है और डीजल पर निर्भरता कम होगी. लेकिन पर्यावरण रिपोर्ट के मुताबिक इससे फिजी के कुल उत्सर्जन में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान होगा, बल्कि आसपास के गांव, स्कूल और होटल भी खतरे में पड़ सकते हैं. टोरा ने कहा, “यहां लोग हर दिन मछली पकड़ते हैं, ताजा केकड़े खाते हैं, इसे वे ‘बीच पैराडाइज’ कहते हैं. सरकार को इसे रोकना चाहिए.”
संयुक्त राष्ट्र में फिजी के राजदूत फिलिपो ताराकिनिकिनी ने भी चेतावनी दी कि यह इलाका “पैसिफिक का ऐशट्रे” नहीं बनना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस परियोजना से जहरीले तत्व फूड चेन में जा सकते हैं. हालांकि परियोजना से जुड़े लोग कहते हैं कि यह सुरक्षित और आधुनिक तकनीक पर आधारित है और इससे लैंडफिल कचरा कम होगा. फिलहाल फिजी सरकार इस योजना की समीक्षा कर रही है, जबकि स्थानीय लोगों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है. (dw.com/hi)


