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ईडी की कुर्की के खिलाफ रानू साहू और परिजनों की 9 अपीलें खारिज
23-Apr-2026 11:47 AM
ईडी की कुर्की के खिलाफ रानू साहू और परिजनों की 9 अपीलें खारिज

अवैध कमाई का स्रोत न मिले तो बराबर मूल्य की वैध संपत्ति भी जांच के दायरे में होगी- हाईकोर्ट

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 23 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हाईकोर्ट ने निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू और उनके परिजनों को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनकी ओर से दायर 9 अपीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यदि अपराध से अर्जित संपत्ति का सीधा पता नहीं चलता, तो प्रवर्तन निदेशालय  समान मूल्य की अन्य वैध संपत्तियों को भी अटैच कर सकता है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। इन अपीलों में रानू साहू, उनके पिता अरुण कुमार साहू, माता लक्ष्मी साहू, भाई पीयूष और पंकज साहू, बहन पूनम साहू सहित अन्य रिश्तेदार शामिल थे, जिन्होंने अपनी संपत्तियों की कुर्की को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि जिन संपत्तियों को ईडी ने अटैच किया है, उनमें से कई वर्ष 2020 से पहले खरीदी गई थीं, जब कथित घोटाला शुरू भी नहीं हुआ था।
वहीं ईडी ने अदालत को बताया कि संबंधित सभी लोगों ने अपनी आय का वैध स्रोत स्पष्ट नहीं किया। एजेंसी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन पर प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली का सिंडिकेट सक्रिय था।

ईडी का आरोप है कि कोरबा और रायगढ़ की कलेक्टर रहते हुए रानू साहू ने इस सिंडिकेट को संरक्षण दिया और बदले में करीब 5.52 करोड़ रुपये की रिश्वत ली। इस रकम को बाद में परिजनों के नाम पर बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया।

जांच में सामने आया कि रानू साहू के परिजनों ने महासमुंद जिले में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी। खरोरा में उनकी माता के नाम पर कृषि भूमि खरीदी गई। कलमीदादर में पिता और भाइयों के नाम पर कई खसरा नंबरों में कुल मिलाकर कई हेक्टेयर जमीन दर्ज है, साथ ही अन्य रिश्तेदारों के नाम पर भी अलग-अलग स्थानों पर भूमि खरीदी गई है। ईडी के अनुसार, यह अधिकांश खरीद उस समय हुई जब रानू साहू कोरबा में कलेक्टर थीं।

16 अक्टूबर 2022 को ईडी ने गरियाबंद जिले के पांडुका स्थित उनके मायके में छापेमारी की थी। इसके बाद बागबाहरा ब्लॉक के कलमीदादर स्थित फार्महाउस में भी जांच की गई। इस दौरान पटवारी और कर्मचारियों से पूछताछ की गई थी। जांच पड़ताल के बाद ईडी ने इन संपत्तियों को अटैच कर लिया था, जिसके विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।


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