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अमित जोगी को हाईकोर्ट से मिली उम्रकैद पर सुप्रीम स्थगन
23-Apr-2026 11:24 AM
अमित जोगी को हाईकोर्ट से मिली उम्रकैद पर सुप्रीम स्थगन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

नई दिल्ली/रायपुर, 23 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिलासपुर हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को एनसीपी के नेता राम अवतार जग्गी की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अमित जोगी की अपील पर नोटिस जारी करते हुए यह आदेश पारित किया।

वेबसाईट लाइव लॉ के अनुसार कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विवादित फैसले के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने हाईकोर्ट के एक अन्य आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें सीबीआई को अपील करने की अनुमति दी गई थी और अमित जोगी को 31 मार्च से पहले जमानत बांड और जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया गया था, ऐसा न करने पर परिणाम भुगतने होंगे। अमित जोगी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल और मुकुल रोहतगी तथा सतीश जग्गी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और गोपाल शंकरनारायणन उपस्थित हुए।

सुनवाई के दौरान, जस्टिस मेहता ने अमित जोगी की सुनवाई किए बिना उच्च न्यायालय द्वारा फैसला सुनाए जाने पर सवाल उठाया। जस्टिस ने टिप्पणी की, यह कैसा फैसला है... बिना सुनवाई के दोषसिद्धि और सजा? अभियोजन पक्ष के अनुसार, राम अवतार जग्गी को 4 जून 2003 को उनकी कार में यात्रा करते समय गोली मार दी गई थी। 2007 में, निचली अदालत ने अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया, जबकि अमित जोगी को बरी कर दिया गया। इसके खिलाफ सीबीआई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। शिकायतकर्ता सतीश जग्गी ने बरी करने के आदेश को चुनौती देते हुए एक अन्य याचिका दायर की।

2011 में बिलासपुर हाईकोर्ट ने सीबीआई की अपील को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया था। पिछले साल सर्वोच्च न्यायालय ने इस राय से असहमति जताते हुए हाईकोर्ट को सीबीआई की अपील पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि अमित जोगी षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार, प्रमुख योजनाकार और प्रेरक शक्ति था। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई पक्ष जानबूझकर मामले में विलंबकारी रणनीति अपना रहा है तो वह मलापरवाह दर्शक बनकर नहीं बैठ सकता।

कोर्ट ने यह बात ध्यान में रखते हुए कही कि अपने मामले की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलने के बावजूद, जोगी ने बार-बार सुनवाई स्थगित करने की मांग की और बहस शुरू करने का जरा भी प्रयास नहीं किया। रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और सबूतों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने आगे कहा, संपूर्ण सबूतों से यह स्पष्ट है कि अमित जोगी पूरी साजिश का मास्टरमाइंड था और तत्कालीन सीएम का पुत्र होने के नाते उसकी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका थी। वह इतना प्रभावशाली व्यक्ति था कि वह पुलिस अधिकारियों को इस बात के लिए राजी कर सकता था कि वे ऐसे लोगों का इंतजाम करें जो खुद को हमलावर के रूप में पेश कर सकें। धन का लेन-देन, बत्रा हाउस, होटल ग्रीन पार्क और मुख्यमंत्री आवास में आरोपियों की अमित जोगी के साथ लगातार बैठकों के सबूत स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि वह शुरू से ही सभी गतिविधियों से अवगत था और पूरा अपराध अमित जोगी के निर्देशों के अनुसार रचा गया था।


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