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महिला आरक्षण के लिए बनाए गए राष्ट्रीय गठबंधन (एनसीडब्लूआर) ने एक बयान जारी कर महिला आरक्षण कानून को फौरन लागू करने की मांग की है.
अपने बयान में एनसीडब्लूआर ने कहा, ''हम 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं. यह पद का पक्षपातपूर्ण दुरुपयोग है, जिससे आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की गंभीर आशंका पैदा होती है.''
''किसी प्रधानमंत्री के लिए यह अत्यंत अनुचित है कि वह जेंडर जस्टिस को राजनीतिक लाभ के लिए हथियार बनाए, राष्ट्रीय मंच का उपयोग विपक्ष को बदनाम करने और महिलाओं के साथ विश्वासघात की झूठी कहानी गढ़ने के लिए करें.''
एनसीडब्लूआर ने आरोप लगाया है कि साल 2023 में महिला आरक्षण लागू करने के लिए शर्तों को शामिल करना महिलाओं के साथ धोखा था.
एनसीडब्लूआर ने साल 2023 में पास हुए महिला आरक्षण कानून से जुड़ी शर्तों को संसद के मानसून सत्र में संशोधन विधेयक लाकर उसे हटाने और क़ानून को फौरन लागू करने की मांग है.
एनसीडब्लूआर ने कहा है, ''हम संसद में विपक्ष के उस हस्तक्षेप का स्वागत करते हैं, जिसने 'पिछले दरवाजे' से परिसीमन लागू करने के प्रयासों को रोका.''
दरअसल 'महिला आरक्षण' से जुड़ा कानून साल 2023 में संसद से पारित हो चुका है. इस विधेयक में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है.
बिल में कहा गया है कि जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसके प्रावधान लागू हो सकेंगे. परिसीमन में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर सीमाएं तय की जाती हैं. (bbc.com/hindi)


