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प्रधानमंत्री को लिखी थी चिट्ठी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 16 अप्रैल। महिला आरक्षण बिल पर संसद में बहस चल रही है। खास बात ये है कि 28 साल पहले अविभाजित मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ के बुद्धिजीवियों से महिला आरक्षण में पिछड़ा वर्ग की भागीदारी की मांग रखी थी। इस सिलसिले में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को पत्र भी लिखा था।
संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा चल रही है। इन सबके बीच रिटायर्ड प्रोफेसर घनाराम साहू ने फेसबुक पर छत्तीसगढ़ प्रांत थिंक टैंक पुराना पत्र साझा किया है। उस समय छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में नहीं आया था। मगर आरक्षित वर्ग बुद्धिजीवियों ने छत्तीसगढ़ प्रांत थिंक टैंक के नाम से संगठन बनाया था। संगठन ने 1 नवंबर 1998 को एक पत्र तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी को भेजा गया था। इसमें महिला आरक्षण विधेयक में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए अलग-अलग आरक्षण का प्रावधान किए जाने की मांग रखी थी। पत्र कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के माध्यम से नई दिल्ली पहुंचाया गया। इसकी प्रतिलिपि बिहार की तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, अन्नाद्रमुक महासचिव जे. जयललिता, केंद्रीय राज्यमंत्री उमा भारती और सांसद शबाना आज़मी को भी भेजी गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि महिला आरक्षण का मूल उद्देश्य देश के सभी वर्गों की महिलाओं का समग्र उत्थान है, लेकिन वर्तमान प्रस्ताव में पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने से यह उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। इससे संसद और विधानसभाओं में पिछड़े वर्ग की महिलाओं की भागीदारी सीमित हो जाएगी।
थिंक टैंक ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि उच्चतम न्यायालय पहले ही सामाजिक एवं शैक्षणिक आधार पर पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने की आवश्यकता को स्वीकार कर चुका है। ऐसे में इसी सिद्धांत को संसद एवं विधानसभाओं में भी लागू किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में 73वें और 74वें संविधान संशोधनों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पंचायत एवं नगरीय निकायों में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण के साथ-साथ राज्यों को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण देने का अधिकार दिया गया है। मध्यप्रदेश सहित कुछ राज्यों ने इसका उपयोग भी किया है, इसलिए इसी तर्ज पर संसद एवं विधानसभाओं में भी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि महिला आरक्षण विधेयक बिना पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के प्रावधान के पारित किया गया, तो इससे एक विशेष वर्ग का वर्चस्व बढ़ेगा और शक्ति का केंद्रीकरण होने की आशंका रहेगी। साथ ही, काका कालेलकर आयोग से लेकर मंडल आयोग तक पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने में हुई देरी का भी उल्लेख करते हुए इसे ऐतिहासिक उपेक्षा बताया गया है।
थिंक टैंक ने अपनी मांग में स्पष्ट किया है कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए अलग-अलग कोटा निर्धारित किया जाए।
इस ज्ञापन पर शिक्षाविदों में रविवि के पूर्व कुलपति प्रो. रामलाल कश्यप, पूर्व कुलपति डॉ. शिवप्रसाद कोष्टा, प्रो. मलराम प्रधान, प्रो. आनंद बिलास भोई, अंतराष्ट्रीय पंडवानी गायिका कु. रितु वर्मा, चिकित्सक पीएल चंद्राकर, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नारायण राव अंबिलकर, रामलाल चंद्रवंशी, प्रो. सीएस सिंगरौल, पूर्व आईएएस डॉ. रघुनाथ प्रसाद सहित कई प्रमुख हस्तियों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें पंडवानी गायिका रितु वर्मा सहित अनेक नाम शामिल हैं। अब इनमें से कई का निधन हो चुका है।



