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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 12 अप्रैल। प्रदेश में ढाई हजार से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है, लेकिन हत्या जैसे जघन्य मामलों के आरोपी नक्सलियों के खिलाफ प्रकरण वापसी आसान नहीं है। सरकार इस सिलसिले में कानूनी सलाह ले रही है और इसके लिए विधिवत कमेटी का गठन किया जा सकता है। कमेटी की अनुशंसा के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
केन्द्र सरकार ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च तक समय-सीमा तय की थी। इस दौरान करीब 27 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों का पुनर्वास जारी है। सरकार ने सरेंडर पॉलिसी बनाई है और उसी के अनुरूप पुनर्वास की प्रक्रिया चल रही है।
बताया गया है कि सरेंडर करने वालों में कई बड़े नक्सली शामिल हैं, जिन पर हत्या सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं। इन नक्सलियों पर 25 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये से अधिक तक के इनाम घोषित थे। सूत्रों के मुताबिक, जघन्य आपराधिक मामलों से जुड़े इन नक्सलियों के खिलाफ प्रकरण वापसी आसान नहीं है।
सरकार इस विषय पर कानूनी सलाह ले रही है और जल्द ही इसके लिए एक कमेटी का गठन किया जा सकता है। सरेंडर करने वालों में रामधार, पापाराव समेत कई ऐसे नक्सली शामिल हैं, जिन पर एक करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था। ऐसे मामलों में प्रकरण पूरी तरह से वापस हो पाएंगे या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
जहां तक पुनर्वास का सवाल है, कुछ नक्सलियों को 10 हजार रुपये तक मासिक सहायता दी जा रही है। हालांकि अभी तक केवल 6 लोगों को ही सरकारी नौकरी दी गई है, जबकि अन्य को रोजगारमूलक योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सभी सरेंडर करने वालों को पुनर्वास योजना से जोड़ा गया है, ताकि रोजगार के अभाव में किसी तरह का असंतोष उत्पन्न न हो।


