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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 26 फरवरी । छत्तीसगढ़ के डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों द्वारा सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के रिक्त 2300 पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर जारी आमरण अनशन 66वें दिन में प्रवेश कर गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि मेरिट सूची में नाम आने और न्यायालयों के आदेशों के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने के कारण वे संवैधानिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं।
25 फरवरी को विधानसभा सत्र के दौरान डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मुद्दा उनके क्षेत्रीय विधायक के माध्यम से सदन में उठाया गया। इसी संदर्भ में अभ्यर्थी वैध पास बनवाकर विधानसभा पहुंचे थे। उनका दावा है कि इस संबंध में पूर्व सूचना अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को भी दी गई थी।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि विधानसभा गेट नंबर 3 के पास से 6 डीएड अभ्यर्थियों, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, को पुलिस ने हिरासत में लेकर बीएनएसएस की धारा 170 के तहत प्रकरण दर्ज किया। आरोप लगाया गया कि उन पर विधानसभा में तोड़फोड़ और मंत्रियों के बंगले में पेट्रोल फेंकने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गईं। बाद में उन्हें एसडीएम कार्यालय भेजा गया, जहां कथित रूप से आंदोलन समाप्त करने के लिए दबाव डाला गया। अंततः सभी 6 अभ्यर्थियों को सशर्त मुचलका भरवाकर रिहा कर दिया गया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे जेल जाने को तैयार हैं, लेकिन 2300 युवाओं के भविष्य से समझौता नहीं करेंगे। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद पुलिस प्रशासन द्वारा मानसिक दबाव बनाकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
अभ्यर्थियों ने यह भी बताया कि इससे पहले लगभग 80 डीएड अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर चार दिनों तक जेल भेजा गया था। 25 फरवरी को विधानसभा सत्र में विपक्ष के विधायक द्वारकाधीश यादव ने भी नियुक्ति का मुद्दा सदन में उठाया।
उन्होंने मांग की है कि झूठे प्रकरणों को तत्काल निरस्त किया जाए,आंदोलनरत अभ्यर्थियों पर दमनात्मक कार्रवाई बंद की जाए, और सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के रिक्त 2300 पदों पर पात्र डीएड अभ्यर्थियों को शीघ्र नियुक्ति दी जाए।
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


