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जेवियर सेल्वकुमार
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने तमिलनाडु के तिरुपुर में छह 'बांग्लादेशियों' को गिरफ़्तार किया है और उन्हें अपने साथ ले गई है. इन लोगों पर दिल्ली में पाकिस्तान के समर्थन में पोस्टर चिपकाने में शामिल होने का आरोप है.
तिरुपुर के पुलिस आयुक्त राजेंद्रन ने बीबीसी तमिल को बताया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार किए गए छह लोगों के ख़िलाफ़ मामले की पूरी जानकारी नहीं दी है.
उन्होंने बताया कि गिरफ़्तार किए गए लोगों के ख़िलाफ़ तिरुपुर में कोई मामला दर्ज नहीं था.
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले डेढ़ साल में तिरुपुर में 200 से अधिक बांग्लादेशियों को गिरफ़्तार कर वापस उनके देश भेजा गया है.
तमिलनाडु में विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने सवाल उठाया है कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से पहले राज्य पुलिस का आतंकवाद विरोधी दस्ता क्या कर रहा था?
उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा, "डीएमके सरकार ने तमिलनाडु में कानून व्यवस्था को इस हद तक बिगाड़ दिया है कि एक आतंकवादी हमले की स्थिति पैदा हो सकती है."
फ़र्ज़ी दस्तावेजों के साथ रह रहे थे
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल शुक्रवार को तिरुपुर पहुंची थी. उसने जिन छह बांग्लादेशियों को गिरफ़्तार किया, वो तिरुपुर शहर के अलग-अलग इलाक़ों में रह रहे थे.
तिरुपुर पुलिस ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने 6 लोगों - मिजानुर रहमान (33 वर्ष), मोहम्मद शबद (35 वर्ष), उमर (32 वर्ष), मोहम्मद लितान (40 वर्ष), मोहम्मद शाहिद (40 वर्ष) और मोहम्मद उज्जवल (29 वर्ष) - को गिरफ़्तार किया और उनके पास से 12 मोबाइल फ़ोन और उत्तर भारतीय राज्य के पते वाले फ़र्ज़ी दस्तावेज जब्त किए.
तिरुपुर नगर पुलिस ने बीबीसी को जो जानकारी दी है उसके अनुसार, "दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर के नेतृत्व में दो सब-इंस्पेक्टर सहित सात लोगों का एक विशेष दल 20 फ़रवरी को तिरुपुर पहुंचा था. पहले इन छह लोगों को तिरुपुर नॉर्थ पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया और अगली सुबह मेडिकल टेस्ट कराने के बाद उन्हें तिरुपुर न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. इसके बाद उन्हें ट्रेन से दिल्ली ले जाया गया."
तिरुपुर शहर के पुलिस आयुक्त राजेंद्रन ने बीबीसी तमिल से कहा, "दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार रात को इन छह लोगों को गिरफ़्तार किया और फिर शनिवार सुबह मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. दिल्ली पुलिस ने इन लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज मामलों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया."
राजेंद्रन ने बताया, "तिरुपुर नगर पुलिस थाना क्षेत्र में किसी भी पुलिस स्टेशन में इन छह लोगों के ख़िलाफ़ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है. ये लोग फ़र्ज़ी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके अलग-अलग जगहों पर रह रहे थे और मजदूरी कर रहे हैं. इस बात की जांच चल रही है कि वे कब से यहां रह रहे थे और कहां काम कर रहे थे."
'पाकिस्तान के समर्थन में पोस्टर चिपकाने वालों से बात की'
तिरुपुर शहर पुलिस ने बताया कि दिल्ली पुलिस के मुताबिक़, 'इन छह लोगों को पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं, क्योंकि हाल ही में दिल्ली में पाकिस्तान के समर्थन में पोस्टर चिपकाने के आरोप में गिरफ़्तार किए गए लोगों से पूछताछ के दौरान इन छह लोगों के फोन नंबर सामने आए थे.'
पुलिस आयुक्त राजेंद्रन ने कहा कि इस बारे में विस्तृत जानकारी दिल्ली में जांच के बाद पता चलेगी.
हाल ही में दिल्ली के जनपथ मेट्रो रेलवे स्टेशन और सुप्रीम कोर्ट सहित कई स्थानों पर चिपकाए गए पोस्टरों में कश्मीर पर भी टिप्पणियां की गई थीं.
हालांकि तिरुपुर शहर पुलिस ने कहा कि तिरुपुर में गिरफ़्तार किए गए लोगों का इन मामलों से क्या संबंध है, इस बारे में उनके पास कोई अन्य जानकारी नहीं है.
इस बीच, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के एडिशनल सीपी प्रमोद कुमार कुशवाहा ने कहा, "7 फरवरी को दिल्ली में कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन और आस-पास के कुछ मेट्रो स्टेशनों पर खंभों पर देश विरोधी पोस्टर चिपकाए गए थे…स्पेशल सेल की टीम कोलकाता गई और लोकल पुलिस की मदद से दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया."
उन्होंने दावा किया है कि स्पेशल सेल की टीम ने बड़े ''आतंकवादी मॉड्यूल'' का भंडाफोड़ किया है.
उन्होंने कहा, "दिल्ली में कई जगहों पर भारत विरोधी पोस्टर लगाए गए थे. कोलकाता में भी ऐसे पोस्टर लगाए गए थे. पूरे मामले की जांच से पता चला कि कुछ लोग जो बांग्लादेशी नागरिक हैं, तमिलनाडु में थे… फिर टीम तमिलनाडु गई और स्थानीय पुलिस की मदद से छह और लोगों को गिरफ़्तार किया."
प्रवासी श्रमिक और बांग्लादेशी घुसपैठिये
तमिलनाडु के एक प्रमुख औद्योगिक शहर तिरुपुर में उत्तर भारत से आए कई लाख श्रमिक रहते और काम करते हैं.
इनमें से केवल एक तिहाई ही परिवार के साथ यहां आकर बसे हैं. अधिकांश लोग अकेले रहते हैं और कपड़े की कंपनियों में काम करते हैं.
तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के महासचिव तिरुकुमारन ने हाल ही में बीबीसी को बताया कि तिरुपुर शहर में कपड़े की कंपनियों में लगभग साढ़े आठ लाख श्रमिक कार्यरत हैं, और उनमें से 40 प्रतिशत प्रवासी श्रमिक हैं.
कोयंबटूर पश्चिमी ज़ोन के आईजी सरवनसुंदर ने बीबीसी के साथ जानकारी साझा करते हुए बताया कि पिछले साल तमिलनाडु के पश्चिमी ज़िलों में 103 'बांग्लादेशियों' को गिरफ़्तार किया गया था.
उन्होंने यह भी बताया कि यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना ज़्यादा थी. यह भी पता चला कि इनमें से अधिकांश लोग तिरुपुर ज़िले में कपड़ा उद्योग से जुड़ी छोटी कंपनियों में कैजुअल लेबर के तौर पर काम करते थे.
पुलिस आयुक्त राजेंद्रन ने बीबीसी तमिल को बताया कि पिछले डेढ़ साल में तिरुपुर शहर पुलिस के अधीन आने वाले क्षेत्रों में 200 से अधिक 'बांग्लादेशियों' को गिरफ़्तार किया गया है.
पुलिस ने पिछले साल तिरुपुर में बिना पासपोर्ट और वीज़ा के काम कर रहे 28 बांग्लादेशियों को गिरफ़्तार किया था. तिरुपुर ज़िला न्यायालय ने हरेक को 2 साल की क़ैद और दस हज़ार रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई थी.
उन्होंने इसके ख़िलाफ़ मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रिहाई और अपने देश लौटने की इच्छा जताई. मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह आदेश दिया कि उन्हें जेल से रिहा कर दिया जाए और तीन महीने के भीतर बांग्लादेश वापस भेजने की व्यवस्था की जाए.
(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.)


