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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 22 फरवरी। केंद्र सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये के अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) को मंजूरी दी है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू का कहना है कि यह सिर्फ योजना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के शहरों को नई पहचान देने का मौका है।
साहू ने कहा कि भिलाई और कोरबा जैसे औद्योगिक शहरों से लेकर रतनपुर और सिरपुर जैसे ऐतिहासिक नगरों तक हर जगह इस फंड से नई ऊर्जा आ सकती है। सिटीज़ एज ग्रोथ हब्स के तहत नवा रायपुर-भिलाई-दुर्ग कॉरिडोर को एकीकृत आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने का अवसर मिलेगा। बेहतर ट्रांजिट, सड़क और आधारभूत ढांचे से यह इलाका निवेश और रोजगार का केंद्र बन सकता है। साथ ही 5,000 करोड़ की क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी योजना से मुंगेली, धमतरी और कवर्धा जैसे शहरों को पहली बार निजी पूंजी तक आसान पहुंच मिलेगी। केंद्र सरकार पहले ऋण पर 70 प्रतिशत तक गारंटी देगी, जिससे 20 करोड़ या उससे अधिक के प्रोजेक्ट भी संभव होंगे। इससे पानी, सफाई और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने का रास्ता खुलेगा।
उन्होंने कहा कि सफाई के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ पहले ही मिसाल बन चुका है। बिलासपुर को स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में राष्ट्रपति पुरस्कार मिला। अंबिकापुर सुपर स्वच्छ लीग सिटी के रूप में पहचाना गया। अब यूसीएफ के जरिए वेस्ट-टू-एनर्जी और आधुनिक कचरा प्रबंधन को और बढ़ावा मिलेगा।
बिलासपुर प्रशासनिक और शैक्षणिक हब के रूप में उभर रहा है। यहां शहरी परिवहन, पानी और स्वच्छता पर निवेश इसे उत्तरी छत्तीसगढ़ का विकास केंद्र बना सकता है।
वहीं बस्तर में विकास को संस्कृति और पर्यावरण के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने की योजना है, ताकि आदिवासी समुदाय भी बराबरी से भागीदार बनें।
साहू ने कहा कि यह फंड परिणाम आधारित है। कम से कम 50 प्रतिशत राशि बाजार से जुटानी होगी। पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और मजबूत संचालन मॉडल अनिवार्य होंगे।
साहू ने कहा कि अब शहरों को अनुदान पर निर्भर रहने की सोच बदलनी होगी। आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार शहर ही विकसित भारत का आधार बनेंगे।


