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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 15 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक आंगनवाड़ी सहायिका को सेवा से हटाने के सरकारी आदेश को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की एकल पीठ ने आदेश दिया कि
याचिकाकर्ता मुरली यादव ने अपने वकील प्राची तरुणधर देवान के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कहा कि 19 अगस्त 2023 को उन्हें जिला बलरामपुर के जनपद पंचायत शंकरगढ़ अंतर्गत समुद्रा आंगनवाड़ी केंद्र में सहायिका के पद पर नियुक्त किया गया था। वे ईमानदारी से काम कर रही थीं और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को ठीक से लागू कर रही थीं।
बताया गया कि विधायक आपके द्वार कार्यक्रम के दौरान उनके खिलाफ शिकायत की गई। याचिकाकर्ता का आरोप था कि यह शिकायत राजनीतिक रंजिश के चलते की गई।
शिकायत के मात्र 13 दिन बाद विभाग ने बिना पूरी जांच के उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया। उनके 19 साल के कार्यकाल और सेवा रिकॉर्ड को नजरअंदाज कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्राची देवान ने तर्क दिया कि केवल एक शिकायत के आधार पर इतनी जल्दबाजी में किसी कर्मचारी को हटाना सेवा नियमों के खिलाफ है। विभाग ने भर्ती और सेवा नियमों का पालन नहीं किया। दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि बर्खास्तगी का आदेश नियमों के अनुरूप नहीं था। अदालत ने आदेश रद्द करते हुए मुरली यादव को उसी पद पर बहाल करने का निर्देश दिया।


