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संभाग के 119 न्यायिक अधिकारियों के सेमिनार में कहा- कानून का सही उपयोग ही न्याय की मजबूती
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 15 फरवरी। जिला न्यायालय परिसर के नए कॉन्फ्रेंस हॉल में शनिवार को संभाग स्तरीय एक दिवसीय न्यायिक सेमिनार आयोजित किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बिलासपुर संभाग के पांच जिलों बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरबा और मुंगेलीके कुल 119 न्यायिक अधिकारी शामिल हुए।
कार्यक्रम का उद्घाटन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं अकादमी के संरक्षक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश मौजूद रहे। साथ ही रजिस्ट्रार जनरल, न्यायालयीन अधिकारी, आईजी, कलेक्टर और एसएसपी भी उपस्थित थे।
मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायिक विवेक का प्रयोग कानून की धाराओं और स्थापित सिद्धांतों के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने बताया कि ऐसे सेमिनार निचली अदालतों में आने वाले रोजमर्रा के कानूनी सवालों पर गंभीर चर्चा का अच्छा मंच देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली कानून लोगों के अधिकार तय करता है, जबकि प्रक्रिया संबंधी कानून उन अधिकारों को लागू करने का रास्ता दिखाता है। इसलिए प्रक्रिया को सिर्फ औपचारिकता न मानकर निष्पक्षता और पारदर्शिता का आधार समझना चाहिए।
सेमिनार में जमानत में समानता का सिद्धांत, एनआई एक्ट की धारा 138 की प्रक्रिया, डिक्री निष्पादन, उत्तराधिकार कानून, जनजातीय प्रथागत कानून और वसीयत के साक्ष्य मूल्य जैसे विषयों पर प्रस्तुतियां और चर्चा हुईं।
कार्यक्रम के दौरान न्यायिक अकादमी की नई आधिकारिक वेबसाइट भी लॉन्च की गई, जिससे प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।


