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मैनपाट महोत्सव केवल मनोरंजन नहीं, सरगुजा की संस्कृति और अस्मिता का वैश्विक मंच बनेगा -विष्णु देव साय
13-Feb-2026 7:27 PM
मैनपाट महोत्सव केवल मनोरंजन नहीं, सरगुजा की संस्कृति और अस्मिता का वैश्विक मंच बनेगा -विष्णु देव साय

तीन दिनी मैनपाट महोत्सव का सीएम ने किया शुभारंभ, पर्यटन विकास के लिए एक करोड़ की घोषणा

'छत्तीसगढ़' संवाददाता
अंबिकापुर, 13 फरवरी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मैनपाट महोत्सव केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सरगुजा की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और पहचान को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यहां की संस्कृति और लोक परंपराओं से पूरे देश और दुनिया के लोग परिचित होंगे।

सरगुजा जिले के मैनपाट स्थित रोपाखार में आयोजित तीन दिवसीय मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया।

मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि इस महोत्सव में बाहर से आए कलाकारों के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों को भी मंच मिलेगा, जिससे वे अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और मैनपाट जैसे क्षेत्र इस दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मैनपाट की उल्टा पानी, दलदली क्षेत्र और प्राकृतिक सौंदर्य इसे एक विशिष्ट पर्यटन स्थल बनाते हैं। सरकार इस क्षेत्र को पर्यटन के साथ-साथ उद्योग के क्षेत्र में भी आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मैनपाट में पर्यटन विकास के लिए एक करोड़ रुपये की घोषणा की। इसके अलावा उन्होंने सीतापुर में सर्व सुविधायुक्त आधुनिक बस स्टैंड निर्माण की स्वीकृति भी दी। मुख्यमंत्री ने जिले में 527 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया।

कार्यक्रम में पहुंचे दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी का सीएम ने स्वागत किया, और सभी को महोत्सव की शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा रोके गए 18 लाख प्रधानमंत्री आवास को वर्तमान सरकार ने बहाल किया और अब तक आठ लाख से अधिक मकानों का गृह प्रवेश कराया जा चुका है।

उन्होंने किसानों से किए गए वादों को पूरा करने की बात कहते हुए कहा कि दो वर्षों से लंबित बोनस का भुगतान उनकी सरकार ने किया, जबकि पूर्ववर्ती सरकार ने अपने कार्यकाल में किसानों को बोनस नहीं दिया।

मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि अब तक इस योजना की 22 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि सरगुजा और बस्तर क्षेत्रों में तेंदूपत्ता पर निर्भर लोगों के लिए सरकार ने तेंदूपत्ता खरीदी दर में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया है। चरण पादुका योजना, रामल्ला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ योजना को पुन: प्रारंभ कर हजारों लोगों को लाभ दिया गया है।

नक्सलवाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर क्षेत्र पिछले 40 वर्षों से नक्सलवाद की समस्या से जूझ रहा है, लेकिन उनकी सरकार ने इसे जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने बस्तर के अधिकांश हिस्सों से नक्सलवाद को समाप्त कर दिया है और शेष क्षेत्रों में भी 31 मार्च तक पूर्ण रूप से सफाया करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि अब बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और राशन जैसी मूलभूत सुविधाएं लोगों तक पहुंचने लगी हैं।

महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस मौके पर विधायक प्रबोध मिंज, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष रामकिसुन सिंह, अखिलेश सोनी, भारत सिंह सिसोदिया, आलोक दुबे, मंजूषा भगत, राजकुमार बंसल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।


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