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मशीनों की स्थापना की समय-सीमा बताने के निर्देश
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 12 फरवरी। सिम्स मेडिकल कॉलेज अस्पताल की अव्यवस्थित स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब तलब किया है। अदालत ने मुख्य सचिव से शपथपत्र प्रस्तुत कर यह बताने को कहा है कि अस्पताल में नई मशीनें कब और किस प्रक्रिया से स्थापित की जाएंगी।
मामले की मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की द्वैधपीठ में गुरुवार को सुनवाई हुई। अदालत को बताया गया कि अस्पताल के लिए 31 मशीनों की खरीद प्रक्रिया जारी है, लेकिन अब तक केवल 7 मशीनें ही तकनीकी रूप से पात्र पाई गई हैं। शेष उपकरणों के संबंध में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
पीठ ने सरकार से पूछा, “कब तक केवल निविदा जारी होती रहेगी? स्थानीय मरीजों का उपचार कैसे होगा?” अदालत ने साफ कहा कि मशीनों की शीघ्र स्थापना सुनिश्चित की जाए, ताकि उपचार व्यवस्था बाधित न हो।
सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक ने बताया कि मेडिकल उपकरणों की खरीद के लिए पांच कंपनियों ने निविदा में भाग लिया है। उपकरणों को पांच श्रेणियों में विभाजित किया गया है। किसी भी श्रेणी में कम से कम तीन निविदाकार होने पर ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, अन्यथा संबंधित श्रेणी में पुनः निविदा जारी की जाएगी।
तकनीकी मूल्यांकन चार से पांच दिनों में पूरा करने और इसी माह आगे की प्रक्रिया शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
पूर्व में दायर शपथपत्र में सिम्स प्रबंधन ने बताया था कि अस्पताल की स्वच्छता, सुरक्षा और उपचार व्यवस्था की निगरानी के लिए एक विशेष व्हाट्सएप मॉनिटरिंग समूह बनाया गया है। इसकी निगरानी डीन और अधीक्षक कर रहे हैं। वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा रात्रि एवं अवकाश के दिनों में नियमित राउंड भी लिए जा रहे हैं, जिससे मरीजों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई संभव हुई है।
इसके अलावा, बढ़ती मरीज संख्या को देखते हुए औषधि वितरण केंद्र का विस्तार किया गया है, जिससे कतारों में कमी आई है। पैथोलॉजी और लैब सेवाओं की गुणवत्ता सुधार के लिए कार्यशालाएं आयोजित कर तकनीशियनों को सैंपल संग्रहण और रिपोर्टिंग मानकों का प्रशिक्षण दिया गया है।
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से विस्तृत शपथपत्र में यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि मशीनों की स्थापना के बाद वे कितने समय तक कार्यशील रहेंगी। मामले की अगली सुनवाई मार्च माह में निर्धारित की गई है।


