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खनन पट्टा रद्द करने की मांग, 22 को सम्मेलन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 13 फरवरी। पेंड्रावन जलाशय को बचाने के संकल्प के साथ पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य सरकार से खनन कंपनी को जारी पट्टा निरस्त करने की मांग दोहराई गई। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों और किसानों ने जलाशय की सुरक्षा को जनजीवन और खेती-किसानी के लिए अनिवार्य बताते हुए आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पेंड्रावन जलाशय क्षेत्र में खनन गतिविधियां जल स्रोत और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। समिति ने राज्य सरकार से स्पष्ट रूप से मांग की कि जलाशय क्षेत्र को संरक्षित घोषित करते हुए जारी खनन लीज तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।
साथ ही, राज्य में 35 नई शराब दुकानों को खोलने के निर्णय पर भी आपत्ति जताई गई और इसे वापस लेने की मांग उठाई गई।
विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा के बाद समिति ने 22 फरवरी को “पेंड्रावन संरक्षण सम्मेलन” आयोजित करने का निर्णय लिया। इस सम्मेलन के माध्यम से जल, जमीन और किसानों के अधिकारों के मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।
बैठक के बाद बांगोली मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन देशभर में श्रमिक और किसान संगठनों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के समर्थन में था। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की कथित किसान-विरोधी और मजदूर-विरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग की।
समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका कृषि समझौता अमेरिकी दबाव में लिया गया निर्णय है, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान होगा। उनका कहना था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य और उचित दाम न मिलने से किसान पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा के लिए बने 44 कानूनों में से 29 को समाप्त कर चार श्रम संहिताओं के माध्यम से करोड़ों मजदूरों को कानूनी दायरे से बाहर किया गया है। इसके अलावा, ड्राफ्ट सीड बिल 2025 को भी कॉर्पोरेट हित में बताया गया, जिससे किसानों की बीज स्वायत्तता प्रभावित होगी।
कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष अनिल नायक, सचिव घनश्याम वर्मा, उधोराम वर्मा, आलोक शुक्ला, प्रदीप मधारिया, नरोत्तम शर्मा, नीलकंठ वर्मा, खेमलाल नायक, गणेश निषाद, वीरनारायण देवांगन, हेमंत ठाकुर, धनेश निषाद, दौलत बघेल, महेंद्र साहू, संतोष साहू, कमल भारती, सूरज टंडन सहित अन्य किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


