ताजा खबर

ट्रेड यूनियनों की कल हड़ताल, आवश्यक सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित
11-Feb-2026 9:24 PM
ट्रेड यूनियनों की कल हड़ताल, आवश्यक सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित

नयी दिल्ली, 11 फरवरी। केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के साझा मंच द्वारा आहूत देशव्यापी हड़ताल की वजह से बृहस्पतिवार को पूरे देश में बिजली, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, स्वास्थ्य के साथ-साथ गैस और पानी आपूर्ति से जुड़ी सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

12 फरवरी को होने वाली आम हड़ताल में अलग-अलग क्षेत्र के 30 करोड़ कामगारों के शामिल होने की उम्मीद है।

ट्रेड यूनियनों के एक समूह ने नौ जनवरी को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया था ताकि ‘‘केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और देश-विरोधी, कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों का विरोध’’ दिखाया जा सके।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर ने पीटीआई भाषा को बताया, ‘‘12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल की वजह से बिजली, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, गैस और जलापूर्ति की सेवाओं पर असर पड़ेगा।’’

उन्होंने बताया कि सभी बैंक यूनियन हड़ताल में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि उनका यूनाइटेड फ्रंट 27 जनवरी को पहले ही हड़ताल कर चुका है। हालांकि, एआईबीईए, एआईबीओए और बीईएफआई जैसी बैंक कामगार यूनियनें विरोध में हिस्सा लेंगी।

इसके अलावा, कौर ने कहा कि खनन और गैस पाइपलाइन क्षेत्र पर भी इस आंदोलन का असर दिखने की उम्मीद है।

बीमा क्षेत्र के कर्मचारी इस क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) की इजाज़त देने और नए श्रम कानून लागू करने के सरकार के फैसले का विरोध करेंगे।

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि निजी और सरकारी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के बड़ी संख्या में कर्मचारी विरोध में हिस्सा लेंगे।

उन्होंने भरोसा जताया कि इस बार, ‘‘कम से कम 30 करोड़ करोड़ कामगार’’ हड़ताल में हिस्सा लेंगे, और करीब 600 जिलों पर इसका असर पड़ने की उम्मीद है।

पिछले साल नौ जुलाई को हुई इसी तरह की हड़ताल में, करीब 25 करोड़ कामगारों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था, जिसका असर करीब 550 से ज़्यादा जिलों पर पड़ा था। कौर के मुताबिक, अलग-अलग जिलों में श्रम आयुक्तों ने अपने मुद्दों पर बात करने के लिए यूनियन नेताओं के साथ बैठक बुलाई है, लेकिन बृहस्पतिवार का आंदोलन फोरम की योजना के मुताबिक ही चलेगा।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) के अध्यक्ष, शैलेंद्र दुबे ने कहा कि देश भर में करीब 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर 12 फरवरी को एक दिन की हड़ताल करेंगे।

यह हड़ताल निजीकरण, बिजली (संशोधन) विधेयक 2025, प्रस्तावित राष्ट्रीय बिजली नीति 2026 और बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने के विरोध में बुलाई गई है।

दुबे ने कहा कि पहली बार, संयुक्त किसान मोर्चा और 10 केन्द्रीय ट्रेड यूनियन बिजली कर्मचारियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए हड़ताल में शामिल हो रहे हैं।

दुबे ने कहा कि बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों, इंजीनियरों, कामगारों और किसानों के शामिल होने से, 12 फरवरी की कार्रवाई के आज़ाद भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्रवाई में से एक बनने की उम्मीद है। उन्होंने आगे कहा कि हड़ताल की एक बड़ी मांग ‘आउटसोर्सिंग’ बंद करना, सीधी भर्ती के ज़रिये नियमित पद भरना और मौजूदा ‘आउटसोर्स कामगारों को नियमित करना है।

एआईपीईएफ ने चिंता जताई है कि बिजली क्षेत्र (वितरण, उत्पादन और पारेषण) का निजीकरण गरीब उपभोक्ताओं, छोटे और मझोले उद्योगों और आम जनता के हितों के खिलाफ है।

दुबे ने कहा कि इसलिए, बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 और प्रस्तावित राष्ट्रीय बिजली नीति 2026 को तुरंत वापस लेना चाहिए।

बैंकिंग सेवाओं पर थोड़ा असर पड़ेगा क्योंकि नौ में से तीन यूनियन -- ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (एआईबीईए), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) और बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) -- हड़ताल में हिस्सा ले रही हैं।

ऑल-इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) और बैंकिंग उद्योग की पांच दूसरी यूनियनें हड़ताल में हिस्सा नहीं ले रही हैं, लेकिन हड़ताल का समर्थन कर रही हैं।

कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पहले ही अपने ग्राहकों को बता दिया है कि हड़ताल की वजह से पूरे भारत में शाखाओं और प्रशासनिक कार्यालयों का कामकाज प्रभावित हो सकता है।

एआईबीओसी के महासचिव, रूपम रॉय ने कहा कि यूनियन ने हड़ताल को समर्थन किया है।

नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ़ बैंक एम्प्लॉइज़ (एनसीबीई) के महासचिव, एल चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘हम हड़ताल का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन हमने केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों को समर्थन दिया है।’’

संयुक्त किसान मोर्चा ने ट्रेड यूनियनों की मांगों को पूरा समर्थन दिया है, जबकि खेती-बाड़ी करने वाले मज़दूरों की यूनियनों का साझा मंच हड़ताल में शामिल हो रहा है, और ग्रामीण नौकरी गारंटी स्कीम ‘मनरेगा’ को फिर से शुरू करने और विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को वापस लेने की मांग कर रहा है।

जॉइंट फोरम के सदस्यों में इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, एसईडब्ल्यूए, एक्टू, एलपीएफ और यूटीयूसी शामिल हैं। (भाषा)


अन्य पोस्ट