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‘सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का नाम हिंदी में ‘सर्वोच न्यायालय’ क्यों नहीं हो सकता: अदालत
11-Feb-2026 9:22 PM
‘सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का नाम हिंदी में ‘सर्वोच न्यायालय’ क्यों नहीं हो सकता: अदालत

नयी दिल्ली, 11 फरवरी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली मेट्रो रेल निगम से पूछा कि ‘सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन के हिंदी साइनबोर्ड पर देवनागरी लिपि में ‘सर्वोच न्यायालय’ क्यों नहीं लिखा जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ उमेश शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिका में मेट्रो स्टेशन के हिंदी साइनबोर्ड पर ‘सर्वोच्च न्यायालय’ के बजाय ‘सुप्रीम कोर्ट’ नाम लिखे जाने पर आपत्ति जताई गई थी।

याचिकाकर्ता ने अपनी बात के समर्थन में बताया कि ‘सेंट्रल सेक्रेटेरिएट’ मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम ‘केंद्रीय सचिवालय’ है।

अदालत ने केंद्र सरकार के वकील को उचित निर्देश प्राप्त करने को कहा।

याचिकाकर्ता ने बताया कि राजभाषा अधिनियम और नियमों के अनुसार, केंद्र सरकार के कार्यालयों में सभी नियमावली, साइनबोर्ड और नामपट्टियां अंग्रेजी व हिंदी में होनी चाहिए और हिंदी का प्रयोग देवनागरी लिपि में होना चाहिए।

याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि न्यायालय की वेबसाइट पर भी हिंदी नाम ‘भारत का सर्वोच न्यायालय’ है।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय प्रशासन ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम को एक पत्र भेजकर मेट्रो स्टेशन का नाम ‘सुप्रीम कोर्ट’ अंकित करने का प्रस्ताव दिया था, जिसे मेट्रो अधिकारियों के एक पैनल ने स्वीकार कर लिया था।

वकील ने कहा, “अनुवाद करने में उन्हें (मेट्रो अधिकारियों को) बहुत आलस आता है। वे गृह मंत्रालय जा सकते हैं। वहां राजभाषा विभाग है। अगर उन्हें कोई समस्या है तो वे अनुवाद करवा सकते हैं। वे हिंदी भाषा को विकृत कर रहे हैं।”

इस मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी। (भाषा)


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