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स्वीकृत पदों से अधिक भर्ती की गई, डिप्लोमा ज्वाइनिंग के बाद हासिल किया
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 4 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्रामीण यांत्रिकी सेवा में वर्ष 2011 में की गई 67 उप अभियंता (सिविल) की नियुक्तियों को अवैध घोषित करते हुए उन्हें निरस्त कर दिया है। अदालत ने पाया है कि यह भर्ती प्रक्रिया वैधानिक नियमों के विपरीत की गई थी और प्रारंभ से ही कानूनसम्मत नहीं थी।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह निर्णय रवि तिवारी द्वारा दायर रिट अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि अभ्यर्थियों को निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके बावजूद कई ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्त कर दिया गया, जिन्होंने डिग्री या डिप्लोमा बाद में हासिल किया। न्यायालय ने इसे नियुक्ति की जड़ में ही गड़बड़ी करार दिया।
हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि भर्ती विज्ञापन केवल 275 पदों के लिए जारी किया गया था, जबकि उससे अधिक पदों पर नियुक्तियां कर दी गईं। अदालत ने कहा कि यह सेवा कानून के स्थापित सिद्धांतों के विरुद्ध है और ऐसी प्रक्रिया को वैध नहीं माना जा सकता।
सुनवाई के दौरान यह तर्क भी दिया गया कि नियुक्त उप अभियंताओं ने लगभग 14 वर्षों तक सेवा दी है, इसलिए उनके मामलों में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। इस पर अदालत ने कहा कि लंबी सेवा अवधि किसी अवैध नियुक्ति को वैध नहीं बना सकती और न ही सहानुभूति के आधार पर वैधानिक शर्तों से समझौता किया जा सकता है।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने ‘क्वो वारंटो’ की रिट जारी करते हुए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा में वर्ष 2011 में की गई 67 उप अभियंताओं की नियुक्तियों को रद्द कर दिया।


